19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
आव्रजन घोटाले में भारतीय दंपती को जेल
18-05-2012

लंदन। ब्रिटेन में अवैध तरीके से रहने के लिए कई हमवतन लोगों की मदद करने के आरोपी एक भारतीय दंपती को जेल की सजा सुनाई गई है। विजय सोरठिया को 10 वर्ष तथा उसकी पत्नी भावना को 15 महीने जेल में काटने होंगे। विजय सन 2000 में विद्यार्थी के रूप में ब्रिटेन आया था। उसने यहां आव्रजन घोटाला किया। उसने कई भारतीयों व अन्य लोगों को अवैध रूप से ब्रिटेन में रहने में मदद की। भावना को पति के काम में सहयोग के आरोप में सजा दी गई है। दोनों को सजा पूरी होने के बाद भारत भेज दिया जाएगा। दोनों के तीन बच्चे हैं। दंपती को बुधवार को आइलवर्थ क्राउन अदालत में सजा सुनाई गई। दंपती माइग्रेशन गुरुज नाम से आव्रजन सलाहकार कंपनी चलाते थे। विजय को मई 2010 में पश्चिमोत्तर लंदन स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया था। यूके बॉर्डर एजेंसी के अफसरों ने उसके पास से 3.30 लाख पाउंड से ज्यादा नकदी जब्त की। वर्ष 2008 से 2010 के बीच इन्होंने ने 160 से ज्यादा ग्राहकों की अवैध तरह से ब्रिटेन में रहने में मदद की। इनके ऐसे 15 ग्राहकों को भी आठ से 10 महीने कैद की सजा सुनाई गई है। इनमें से 14 को ब्रिटेन से निर्वासित कर दिया गया है। यूके बॉर्डर एजेंसी के प्रवक्ता एडम एडवर्ड ने बताया, ‘सोरठिया के दर्जनों ग्राहकों ने खुद को दक्ष बताते हुए अपना वीजा बढ़ाने के लिए गृह विभाग में आवेदन दिया था। इनमें से अधिकतर भारतीय थे और पहले से ही यहां रह रहे थे।सोरठिया को गृह विभाग से जुड़े आव्रजन सेवा आयुक्त में बतौर सलाहकार के रूप में मान्यता प्राप्त थी। इस हैसियत से वह लोगों को आव्रजन, निवास और नागरिक आवेदनों के बारे में सहायता कर सकता था। ग्राहक इस सेवा के बदले उसे 3,000 से 4,000 पौंड देते थे।वीजा पाबंदियों से ब्रिटिश विश्वविद्यालयों को नुकसान ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों को हर साल पांच से आठ अरब पाउंड का घाटा उठाना पड़ सकता है। इसकी वजह वीजा संबंधी नई पाबंदियां हैं। ये भारत तथा गैर-यूरोपीय संघ के देशों से आने वाले विद्यार्थियों पर लागू होती हैं। ब्रिटेन के 134 उच्च शिक्षा संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन यूनिवर्सिटीज यूके ने इस बारे में चिंता जाहिर की है। संगठन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि गठबंधन सरकार नए बदलावों की तुरंत समीक्षा कर उन्हें रद्द करे। अन्यथा विश्वविद्यालयों को घाटा उठाना पड़ेगा। विश्वविद्यालय पहले से ही वित्तीय मदद में कटौती का सामना कर रहे हैं। संगठन के प्रवक्ता के मुताबिक, यूनिवर्सिटीज यूके के अध्यक्ष प्रोफेसर एरिक थॉमस का लिखा पत्र कैमरन को भेजा जा रहा है। भारत और अन्य देशों के विद्यार्थियों के आवेदनों में कमी आने की खबरें पहले से ही आ रही हैं। एक विश्वविद्यालय ने तो विदेशी विद्यार्थियों के आवेदनों की संख्या में 40 फीसदी की गिरावट आने की रिपोर्ट दी है। वीजा संबंधी नई पाबंदियों के तहत पढ़ाई पूरी करने के बाद कार्य वीजा देना बंद कर दिया गया है। इस वीजा के जरिए विद्यार्थियों को ब्रिटेन में पढ़ाई के कुछ खर्च की भरपाई में मदद मिल जाती थी।