18 February 2019



खेलकूद
मेरीकोम लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई
19-05-2012

क्विनहुआंग्डो। पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मेरीकोम (51 किग्रा) ने शुक्रवार को लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया। वे इस खेल महाकुंभ के लिए क्वालीफाई करने वाली अकेली भारतीय महिला मुक्केबाज हैं। मणिपुर की इस 29 वर्षीय मुक्केबाज को हालांकि विश्व चैंपियनशिप में क्वार्टर फाइनल में हारने के कारण भाग्य के सहारे ओलंपिक की टिकट मिली। यह 2001 के बाद पहला अवसर होगा, जब उन्हें विश्व चैंपियनशिप से बैरंग लौटना होगा।मेरीकोम ने क्वार्टर फाइनल में उन्हें हराने वाली इंग्लैंड की निकोला एडम्स की सेमीफाइनल में रूस की इलेना सेवेलएवा पर 11-6 से जीत से ओलंपिक में प्रवेश किया। महिला मुक्केबाजी को पहली बार ओलंपिक में 51 किग्रा, 60 किग्रा और 75 किग्रा भार वर्ग में शामिल किया गया है। विश्व चैंपियनशिप इसके लिए क्वालीफाई करने का पहला और एकमात्र टूर्नामेंट है। मेरीकोम के वर्ग में एशिया से दूसरी सीट चीन की एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता रेन चानचान को मिली, जो अब फाइनल में पहुंच गई हैं। दूसरी सीट मेरीकॉम और उत्तर कोरिया की हाइ किम में से किसी एक को मिलनी थी। मेरीकॉम को जहां एडम्स ने हराया, वहीं किम को क्वार्टर फाइनल में सेवेलएवा से हार का सामना करना पड़ा था। सेवेलएवा और एडम्स के बीच मुकाबले से एशिया से दूसरी सीट का फैसला होता और सौभाग्य से परिणाम भारतीय खिलाड़ी के अनुरूप रहा, लेकिन मेरीकोम की तरह परिणाम एल सरिता देवी (60 किग्रा) के अनुरूप नहीं रहा। उन्हें क्वार्टर फाइनल में हराने वाली नताशा जोन्स सेमीफाइनल में हार गई। सरिता को एशिया से ओलंपिक टिकट दिलाने के लिए जोन्स का स्वर्ण पदक जीतना जरूरी था। भारत की पूजा रानी 75 किग्रा में पहले दौर में ही बाहर हो गई थी।मैं खुश हूं आखिर में मुझे ओलंपिक की टिकट मिल गई। मैं बहुत खुश हूं। मैंने यह मुकाबला देखा था। मैं जानती थी कि रूसी खिलाड़ी बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन मैं दुखी भी हूं कि मैं इस बार पदक नहीं जीत पाई। मेरे लिए पदक बहुत महत्वपूर्ण है। मैं क्वालीफाई करके खुश हूं। एमसी मेरीकोम कविता को कांस्य कविता (81 किग्रा से अधिक) को शुक्रवार को कजाकिस्तान की युल्डस मामतकुलोवा के हाथों सेमीफाइनल में शिकस्त के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा, जो विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में भारत का एकमात्र पदक रहा। कविता को सेमीफाइनल में 9-15 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वे भारत की 10 सदस्यीय टीम में पदक जीतने वाली एकमात्र खिलाड़ी रही। भारत का यह इस प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे खराब प्रदर्शन है। देश का सर्वश्रेष प्रदर्शन 2006 में रहा, जब वह आठ पदक जीतकर शीर्ष पर रहा था।