24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
50 करोड़ डॉलर की सहायता म्यांमार को देगा भारत
28-05-2012

ने पाई ता। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति थीन सीन से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान सिंह ने सीन को सुझाव दिया कि दोनों देशों को अपनी सीमा पर आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबले के अलावा सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में संयुक्त रणनीति बनानी चाहिए। इस बीच भारत और म्यांमार ने एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसमें 50 करोड़ डॉलर का ऋण, सीमावर्ती इलाकों का विकास तथा हवाई सेवाओं से संबंधित समझौते शामिल हैं। दिसंबर 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की म्यांमार यात्रा के 25 साल बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री ने मेजबान देश का दौरा किया है। सिंह ने सीन के साथ अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल के अगुवा के तौर पर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संक्षिप्त वार्ता की। इससे पहले, विदेश मंत्री एस एम कृष्णा और आला अधिकारियों के साथ गए प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति भवन के लॉन में भव्य स्वागत किया गया। म्यांमार का पारंपरिक हिंदेशियन वस्त्र 'लोंगी' पहने हुए सीन ने सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर से हाथ मिलाया। दोनों गणमान्य व्यक्तियों के आज सुबह राष्ट्रपति भवन पहुंचने के बाद मेजबान और मेहमान नेताओं की मुलाकात हुई। राष्ट्रपति सीन ने प्रधानमंत्री की बातचीत से पहले कृष्णा ने कहा कि भारत और म्यांमार, दोनों आतंकवाद और उग्रवाद का सामना कर रहे हैं। लिहाजा यह जरूरी है कि हम दोनों इस बाबत संयुक्त रणनीति बनाएं कि इन आतंकी तत्वों से किस तरह से मुकाबला किया जाए। कृष्णा ने कहा कि दोनों तरफ उग्रवादी भी हैं। इसलिए मेरा मानना है कि हमें इससे निपटने के लिए एक समझ विकसित करनी होगी। म्यांमार के साथ हमारा एक समझौता है, हम म्यांमार के साथ सहयोग करते रहे हैं और इस सहयोग को बढ़ाना जरूरी है। विदेश मंत्री ने यह कहते हुए म्यांमार के साथ भारत के रिश्तों के आर्थिक पहलुओं पर जोर दिया, यह भी समान रूप से अहम है। म्यांमार भी भारत की तरह ही एक विकासशील देश है। वह अपनी कुछ आंतरिक समस्याओं से उबर गए हैं और अब वे व्यवस्थित होते नजर आ रहे हैं। कृष्णा ने कहा कि यह समय देकर एक विकासवादी एजेंडा शुरू करने का वक्त है। मेरा मानना है कि म्यांमार के लोगों को भारत की मदद की जरूरत है और भारत उन्हें मदद देना चाहेगा। नगा उग्रवादी संगठन एनएससीएन [के] के साथ म्यांमार सरकार की ओर से संघर्षविराम पर दस्तखत और भारत की ओर से इस कदम की तारीफ की पृष्ठभूमि में कृष्णा ने यह बयान दिया। म्यांमार में चीन की बढ़ती मौजदूगी के बारे में कृष्णा ने कहा कि हर देश का अपना रिश्ता होता है। चीन के साथ म्यांमार के अपने संबंध हैं, भारत के भी चीन के साथ अपने संबंध हैं। इसलिए हमें मुद्दों को मिलाना नहीं चाहिए। हर रिश्ता एक-दूसरे से स्वतंत्र होता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह म्यांमार नेतृत्व से ऊर्जा एवं व्यापार क्षेत्र में सहयोग के अलावा सड़क, रेल और हवाई मार्ग के प्रसार पर मुख्य रूप से चर्चा करेंगे। म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मनाडलय और इंफाल के बीच बस सेवा की शुरुआत के मुद्दे पर भी बातचीत होगी। सिंह इर्रावदी नदी पर कलादान बहुविध परिवहन परियोजना और सित्तवे पोर्ट के काम में तेजी लाने के बारे में भी चर्चा करेंगे। यह दोनों परियोजनाएं भारत को अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच को आसान बनाने में मददगार साबित होगी। दोनों देश अप्रैल 2008 में औपचारिक रूप से कलादान बहुविध ट्रांजिट परिवहन परियोजना पर सहमत हुए थे और सित्तवे पोर्ट से जुड़ा काम भी सितंबर 2010 में शुरू हुआ था। भारत का एस्सार समूह 70,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में पोर्ट का निर्माण कर रहा है। इस पोर्ट में 539 किलोमीटर का सफर तय कर जहाज कोलकाता से आएंगे। पोर्ट के निर्माण से इस जलमार्ग पर हर साल 500,000 टन भार के माल की आवाजाही संभव हो सकेगी। सित्तवे से कलादान नदी पार करके जहाज पलेटवा शहर जाएंगे। पलेटवा में एस्सार समूह एक और छोटा सा पोर्ट बनाएगा। 122 किलोमीटर लंबा एक राजमार्ग पलेटवा को मिजोरम से जोड़ेगा। दशकों के अलगाव से म्यांमार के उबरने के पहले से ही भारत के साथ उसका व्यापार पहले से ही बढ़ रहा है। म्यांमार की सरकार को उम्मीद है कि भारत के साथ दोतरफा व्यापार अगले दो सालों में दोगुना बढ़कर तीन अरब अमेरिकी डॉलर तक हो जाएगा। फिलहाल यह 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर है। भारत थाइलैंड और चीन के बाद म्यामां का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और चीन, थाइलैंड एवं सिंगापुर के बाद मेजबान देश का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। बहरहाल, कृष्णा ने कहा कि चीन की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी और बंगाल की खाड़ी में भविष्य में चीन की मौजूदगी के बारे में बेचैनी को लेकर भारत को म्यांमार का सामरिक महत्व मालूम है। सित्तवे के पास ही चीन के धन से एक बड़े पोर्ट और विशेष आर्थिक क्षेत्र का निर्माण क्याउकफ्यू में किया जा रहा है। एक यह तटीय शहर है जहां म्यामां-चीन पाइपलाइन बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती है। भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि भारत भी म्यांमार में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने के बारे में विचार कर रहा है।