24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
भारत की छवि ईरान मुद्दे पर धूमिल करने की कोशिश
31-05-2012

वाशिगटन। भारत ने कहा कि ईरान से तेल आयात के मुद्दे पर उसे नकारात्मक रूप से पेश करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वह पहले ही यह साफ कर चुका है कि अपनी 1.2 अरब की आबादी की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए उसे भारी ऊर्जा की जरूरत है। ईरान से तेल आयात के मुद्दे पर अमेरिकी थिक टैंक एटलाटिक काउंसिल की एक सभा को संबोधित करते हुए अमेरिका में भारत की राजदूत निरूपमा राव ने कहा कि मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि पता नहीं क्यों किसी तरह भारत को नकारात्मक रूप से पेश किया जा रहा है। राव ने कहा कि अपनी विशाल ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए भारत ईरान से कच्चे तेल का आयात कर रहा है और वह इस मुद्दे पर अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ स्पष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि जैसा कि कई जगहों पर आरोप लगाया जा रहा है कि भारत ईरान से तेल आयात के बदले में छिपाकर भुगतान कर रहा है, वैसा कुछ नहीं है। राव ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट रहा है और उसने अपने सहयोगियों को स्पष्ट रूप से इसके बारे में बता दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा संबंधी विशाल आवश्यकताएं हैं लेकिन हम समझते हैं कि ईरान से तेल आयात के मुद्दे पर कई अवरोध हैं। हमें वास्तविकता का पता है। ईरान के साथ हमारे तेल आयात में कमी आई है। उन्होंने कहा कि हम पूरी तरह एक तेल आयातक देश हैं। अपनी आवश्यकता का 75 प्रतिशत तेल हम विदेशों से आयात करते हैं। ईरान हमारा पारंपरिक तेल आपूर्तिकर्ता देश है। हमारी रिफाइनरिया वहा से आयातित तेल का प्रसंस्करण करती हैं। लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए किसी देश के लिए ईरान से तेल आयात करना मुश्किल हो गया है। राव ने कहा कि हमें अमेरिका की चिंताओं का पता है और हमारे बीच ईरान के मुद्दे पर बातचीत चल रही है। भारत के ईरान से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। अमेरिका में भारत की राजदूत राव ने कहा कि भारत का मानना है कि ईरान को परमाणु उूर्जा के शातिपूर्ण प्रयोग का अधिकार है लेकिन उसने जिन संधियों पर सहमति जताई है उसकी शर्तों का उसे कड़ाई से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने लगातार कहा है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रमों को लेकर जारी संदेहों को खत्म करने के लिए आईएईए [अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी] के साथ सहयोग करना चाहिए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा ईरान के खिलाफ लगाए गए बहुपक्षीय प्रतिबंधों का समर्थन और पालन किया है।