19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
सीरियाई सेना पर हो सक ती है कारवाई
02-06-2012

जिनेवा। सीरियाई सेना और सरकार समर्थित मिलिशिया को ओला नरसंहार के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत [आइसीसी] में मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों का दावा है कि ओला नरसंहार के लिए सीरिया सरकार ने ही आदेश दिए थे। ध्यान रहे कि ओला नरसंहार में 34 महिलाओं और 49 बच्चों समेत कुल 108 लोग मारे गए थे। सीरिया सरकार नरसंहार के लिए विद्रोहियों और आतंकियों को जिम्मेदार ठहरा रही है। यूएन मानवाधिकार आयोग की उच्चायुक्त नवी पिल्लै ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है वह ओला नरसंहार को अंजाम देने वालों पर हेग स्थित अपराध अदालत में मुकदमा चलाने की संस्तुति करे। पिल्लै ने सुरक्षा परिषद से सीरिया में शांति समझौता लागू कराने के लिए दबाव बढ़ाने की भी अपील की है। सीरिया नरसंहार की निंदा के लिए पांचवीं बार बुलाई गई यूएन मानवाधिकार आयोग की आपात बैठक में पिल्लै ने कहा कि सीरियाई सेना ने ओला में भारी बमबारी की और सरकार के इशारे पर शाबीबा नामक मिलिशिया ने बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों का कत्लेआम किया। पिल्लै ने कहा, 'जिन लोगों ने नरसंहार का आदेश दिया, जिन्होंने हमले किए और वे जो आम लोगों को बचाने में नाकामयाब रहे-सभी सजा के हकदार हैं।' आपात बैठक में अमेरिका, कतर और तुर्की ने संयुक्त प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नरसंहार की यूएन जांच के जल्द से जल्द आदेश दिए जाएं। इस बात पर सहमति बनती दिख रही थी, लेकिन सीरिया के प्रतिनिधि ने जोरदार बचाव किया और इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के दूत कोफी अन्नान ने सीरिया में जारी हिंसा पर हताशा जताई है। अन्नान ने कहा, 'मैं शांति की दिशा में तेजी से प्रगति होते देखना चाहता हूं, लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हो पा रहा है।' अन्नान ने स्पष्ट कहा कि अगर समझौता लागू नहीं हो पाया तो सुरक्षा परिषद को अपने अधिकारों का खुलकर प्रयोग करना चाहिए। अन्नान से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी संकेत दिए थे कि अमेरिका सुरक्षा परिषद की मर्जी के खिलाफ जाकर भी सीरिया में दखल दे सकता है। हिलेरी सीरिया के मुद्दे पर रूस से नाराज थीं। रूस के प्रतिनिधि सीरिया पर कड़ी कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा परिषद में सीरिया पर प्रस्ताव पारित नहीं हो पा रहा है।