19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
चीन से रिश्ते बेहतर करना चाहता है भारत: कृष्णा
07-06-2012

बीजिंग। भारत ने आज चीन से कहा कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार को अपनी विदेश नीति की प्राथमिकता के तौर पर देखता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव का भविष्य में संबंधों पर पड़ने वाले असर की चिंताओं को परे रखते हुए भारत ने चीन के साथ रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने की इच्छा जताई।चीन के साथ गर्माहट भरे संबंधों की चाहत के बारे में गंभीर संदेश देते हुए यहां आए विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने चीन के उप प्रधानमंत्री ली केकिआंग से कहा कि मजबूत और स्वस्थ संबंधों के लिए आवश्यक है कि दोनों देशों के बीच विश्वास और समझ विकसित हो ।ली के साथ करीब 45 मिनट की बैठक के बाद कृष्णा ने भारतीय मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैंने उनसे कहा कि चीन के साथ हमारा संबंध भारत की विदेश नीति क प्राथमिकता है और हम मानते हैं कि भारत-चीन का संबंध 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक होगा।शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए कृष्णा ने कहा कि ली के साथ बैठक के दौरान उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि चीन का नया युवा नेतृत्व भारत-चीन संबंधों के भविष्य की दिशा को किस रूप में देखता है। कृष्णा ने कहा कि उन्होंने ली को भारत आने का न्योता दिया। संभावना है कि सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में बदलाव के बाद अगले वर्ष ली चीन के प्रधानमंत्री बनेंगे। ऐसे में नए चीनी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल के लिहाज से कृष्णा की यह मुलाकात बेहद अहम है। हाल में ही अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में और विशेष तौर पर दक्षिण चीन सागर में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की घोषणा की है, जहां चीन का अन्य कई देशों के साथ विवाद चल रहा है। चीन के विश्लेषकों को लगता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करने के लिए अमेरिका भारत को लुभा रहा है।दक्षिण चीन सागर के बारे में कृष्णा ने कहा, ‘भारत का रुख पूरी तरह से स्पष्ट है। ये सभी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हैं जो देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैं, इसलिए हमें इसे ऐसी ही दृष्टि से देखना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत अन्य देशों के साथ इस विषय पर सहयोग करेगा ताकि इन जलमार्गों के जरिए कारोबार को बढ़ाया जा सके।