19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
भारत ने एससीओ की पूर्ण सदस्यता के लिए पेश की दावेदारी
08-06-2012

बीजिंग। भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की पूर्ण सदस्यता के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। एससीओ के 12वें शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि भारत इस समूह में साथ जुड़ने की उम्मीद करता है। यह शिखर सम्मेलन गुरुवार को चीन की राजधानी में संपन्न हुआ। कृष्णा ने कहा,‘भारत अपने एससीओ की सभी बैठकों में रचनात्मक रूप से भागीदारी करता रहा है। पर्यवेक्षक के तौर पर ऐसा करते हुए हमने यह दिखाया है कि हम इस समूह के साथ सार्थक सहयोग साझेदारी के इच्छुक हैं।उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि एससीओ हमारे क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि को लेकर बड़ी भूमिका निभा सकता है।उल्लेखनीय है कि एससीओ में भारत और पाकिस्तान को सदस्यता दिलाने के लिए रूस जोरदार ढंग से पैरवी करता रहा है। कृष्णा ने कहा कि अफगानिस्तान से नाटो के जाने की पृष्ठभूमि में इस युद्धग्रस्त देश में एससीओ के लिए भारत अपनी बड़ी भूमिका देखता है। उन्होंने कहा, ‘आज के समय हम जो सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती का सामना कर रहे हैं, वह अफगानिस्तान से जुड़ी हुई है। अफगानिस्तान एशिया का दिल और मध्य को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाला सेतु भी है।इस दौरान आतंकवाद को लेकर भारत और क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढांचा रैट्स के बीच बड़े सहयोग की जरूरत पर भी विदेश मंत्री ने जोर दिया। गौरतलब है कि रैट्स एससीओ के सदस्य देशों का एक समूह है। एससीओ का गठन 2001 में किया गया था। इस संगठन में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान हैं। भारत, मंगोलिया, ईरान और पाकिस्तान पर्यवेक्षक व बेलारूस एवं श्रीलंका संवाद साझेदार की भूमिका में इस संगठन के साथ हैं।खाने की मेज पर मिले कृष्णा-जरदारी बैठक से अलग विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से संक्षिप्त मुलाकात हुई। जरदारी और कृष्णा एससीओ नेताओं के लिए दोपहर के भोज के दौरान एक ही टेबल पर खाने के लिए बैठे। दोनों नेता आपस में बातचीत करते देखे गए। जरदारी ने चीन समर्थित सुरक्षा मंच के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात की। नाटो जैसा सैन्य मंच नहीं बनेगा एससीओ : चीनचीन ने कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन नाटो की तरह सैन्य एवं राजनीतिक समूह का रूप नहीं लेगा। एससीओ की तुलना नाटो से करने से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लियू वेमिन ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि एससीओ गुटनिरपेक्ष, टकराव विरोधी, कि सी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाने और बाहर के पक्षों के लिए खुलेपन को लेकर प्रतिबद्ध है। इस तरह की अटकलें लगाई जा रही थी कि चीन और रूस के दखल वाला यह समूह आगे चलकर एक बड़े सुरक्षा मंच में तब्दील हो सकता है।ईरान में शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का समर्थन: रूसरूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने ईरान से कहा है कि मॉस्को उसके परमाणु कार्यक्रम को उस वक्त तक समर्थन देगा जबतक वह शांतिपूर्णहै। पुतिन ने बीजिंग में शंघाई क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान अलग से हुई मुलाकात में पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से कहा, ‘हमने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग समेत हमेशा आधुनिक प्रौद्योगिकी पाने की ईरान की जनता के अधिकार का समर्थन किया है।उन्होंने कहा, ‘लेकिन मैं जोर देना चाहूंगा कि हम शांतिपूर्ण उपयोग के बारे में बात कर रहे हैं।पुतिन के तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी और अहमदीनेजाद की पहली वार्ता है। अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों का मानना है कि ईरान असैनिक परमाणु कार्यक्रमों की आड़ में परमाणु बम का विकास करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, तेहरान बार-बार कहता रहा है कि उसके इरादे शांतिपूर्ण हैं।