24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
हक्कानी का मेमोगेट कांड में हाथ
12-06-2012

इस्लामाबाद/वाशिंगटन। मेमोगेट कांड में अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी का हाथ था और वे देश के प्रति वफादार नहीं थे। पाकिस्तानीन्यायिक आयोग की रिपोर्ट में हक्कानी पर आरोप लगाया गया है कि मेमो के माध्यम से हक्कानी ने अमेरिका से सहयोग मांगा और वह नए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का प्रमुख बनना चाहते थे। इस बीच, हक्कानी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें राजनीति से प्रेरित व एकपक्षीय बताया। सुप्रीमकोर्ट ने सोमवार को न्यायिक आयोग की रिपोर्ट की जांच के लिए नौ जजों की पीठ गठित की थी। आयोग ने उस रहस्यमय मेमो की जांच की है, जिसमें बीते साल अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद तख्तापलट के डर से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा अमेरिकी मदद लेने की बात कही गई है। पीठ के समक्ष सील रिपोर्ट पेश होने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने अटार्नी जनरल इरफान कादिर से कहा कि वह अनुशंसाओं को पढ़ें। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका में राजदूत के तौर पर काम करते हुए हक्कानी देश के प्रति वफादार नहीं रहे और और देश के परमाणु हथियारों, सुरक्षा बलों, इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस और संविधान को कमतर आंका। पैनल ने कहा कि कथित मेमो विश्वसनीय था और हक्कानी के निर्देश पर तैयार किया गया था। इसमें कहा गया कि मेमो के माध्यम से हक्कानी ने अमेरिका से सहयोग मांगा और वह नए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे का प्रमुख बनना चाहते थे। पैनल ने कहा कि वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास द्वारा एक गुप्त कोष से करीब बीस लाख डालर के खर्च का हक्कानी ने हिसाब नहीं दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दो हफ्ते के लिए स्थगित कर दिया और हक्कानी को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर वह स्वयं उपस्थित हों। इसने मामले में शामिल सभी पक्षों को नोटिस जारी किया। पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। मेमो में कहा गया था कि अधिकारी 2008 के मुंबई हमलों के जिम्मेदार सहित अन्य आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे और एक नए राष्ट्रीय सुरक्षा दल का गठन करेंगे जो अमेरिका के साथ काम करेगा। सरकार और हक्कानी ने मेमो को फर्जी बताकर खारिज किया था। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता पीएमएल एन के प्रमुख नवाज शरीफ के विरोध के बाद च्च्चतम न्यायालय ने जांच शुरू की। अदालत ने मामले की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया। इस बीच, न्यायिक व्यवस्था पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए हक्कानी ने मेमो आयोग की रिपोर्ट को 'राजनीतिक एवं एकपक्षीय' करार दिया। हक्कानी ने वाशिंगटन में जारी बयान में कहा कि उनके वकील 'आयोग की एकतरफा कार्यवाही का विरोध करेंगे जिसने मेरा पक्ष नहीं सुना।' उन्होंने कहा, 'मेमो आयोग की रिपोर्ट का उपयोग अन्य च्च्जाजनक मुद्दों से ध्यान हटाना है। इसके दावे राजनीतिक हैं न कि कानूनी।' हक्कानी ने ट्विट किया, आयोग 'कोई अदालत नहीं' है और जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि 'इसने दोष या निर्दोष तय किया है तो वे गलत हैं।' ट्विटर पर उन्होंने लिखा, 'देशभक्ति वे लोग तय नहीं कर सकते जो आरोप लगाने वाले विदेशियों पर निर्भर हैं और पाकिस्तानी नागरिक की बात नहीं सुनते। जिन लोगों ने सेना के तानाशाहों का समर्थन किया और उन्हें संविधान में संशोधन की अनुमति दी वे मेरी या किसी और की देशभक्ति का आकलन नहीं कर सकते। हक्कानी फिलहाल अमेरिका में हैं। उल्लेखनीय है कि बीते साल पाकिस्तानी-अमेरिकी व्यवसायी मंसूर एजाज ने विवादास्पद मेमो के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी को इस्तीफा देना पड़ा था। एजाज ने दावा किया था कि उसने हक्कानी के निर्देश पर मेमो बनाया और उसे अमेरिकी सेना प्रमुख तक पहुंचाया। सरकार इस बात को खारिज कर चुकी है। आयोग ने सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये लंदन से व्यवसायी का बयान लिया था। सुरक्षा कारणों से एजाज ने पाकिस्तान आने से मना कर दिया था।