17 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
पुतिन के खिलाफ जनता में बढ़ता असंतोष
13-06-2012

मास्को। रूस के नए राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ता ही जा रहा है। सोमवार को मास्को में विपक्ष ने एक बार फिर पुतिन विरोधी प्रदर्शन रैली निकाली। प्रदर्शनकारी 'रूस आजाद होगा' के नारे लगा रहे थे। विपक्षी नेता इल्या पोनोमारयोव ने दावा किया कि प्रदर्शन में लगभग 70,000 लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि रैली को रोकने के लिए मात्र 18,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे। इससे साफ है कि पुतिन प्रशासन ने इतने बड़े प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की थी। पुतिन के क्रेमलिन में आने के बाद से उनके खिलाफ यह सबसे बड़ा प्रदर्शन है। सात मई को राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के बाद पुतिन प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए थे। इसके बाद भी उनके खिलाफ प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। विरोध का नेतृत्व करने वाले वामपंथी नेता सर्गेइ उदात्सोव को समन भी जारी किया गया है, लेकिन उन्होंने इससे डरे बिना मुहिम जारी रखने का संकल्प जताया है। उन्होंने कहा, 'पुतिन को अपनी करनी का फल भुगतना होगा। हम उन्हें जेल भेजकर रहेंगे।' पुतिन ने राष्ट्रपति के रूप में पहले दो कार्यकाल के दौरान सत्ता पर मजबूत पकड़ के साथ शासन किया था, लेकिन इस बार वह मुश्किल में घिरते दिखाई दे रहे हैं। पुतिन की तीसरी जीत पर विपक्ष ने धांधली के आरोप लगाए थे। इस मुद्दे को लेकर अभी तक उनकी फजीहत हो रही है। सोमवार को रैली के दौरान प्रदर्शनकारी कह रहे थे, 'योद्धाओं को डर नहीं लगता'। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुतिन की ओर से प्रदर्शनों पर पाबंदी को नागरिक किस प्रकार से ले रहे हैं। वे 'पुतिन बिना रूस' जैसे नारे भी लगा रहे थे। ध्यान रहे कि प्रदर्शनकारी यह जानते हैं कि उन्हें इसके लिए दो से तीन साल की जेल हो सकती है। इसके बाद भी वे सड़कों पर उतर रहे हैं।