19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका के साथ भारत ने किया पहला असैनिक परमाणु करार
14-06-2012

वाशिंगटन। अमेरिका के साथ असैनिक परमाणु करार के तहत एक हजार मेगावाट के पहले परमाणु संयंत्र की स्थापना के शुरुआती कार्य के लिए बुधवार को पहल हो गई। भारत-अमेरिका के बीच तीसरी रणनीतिक वार्ता के मौके पर न्यूक्लियर पॉवर कापरेरेशन ऑफ इंडिया ने इसके लिए अमेरिकी फर्म वेस्टिंगहाउस के साथ समझौते पर दस्तखत कर दिए। गुजरात के भावनगर जिले में मिथिविरडी में प्रस्तावित संयंत्र के लिए यह करार किया गया है। विदेश मंत्री कृष्णा के साथ मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस करार को अहम बताया। हालांकि उन्होंने परमाणु जवाबदेही विधेयक को लेकर अमेरिकी फर्मो की आपत्तियों का भी उल्लेख किया। परिपक्व संबंधों की ओर अमेरिका के साथ तीसरी रणनीतिक वार्ता बुधवार को वाशिंगटन में शुरू हुई। इसमें सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग, व्यापार व निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा एवं परस्पर संबंध और दक्षिण व पूर्व एशिया में सहयोग के पांच मुद्दों को केंद्र में रखा गया है। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और हिलेरी क्लिंटन ने वार्ता शुरू करने के पूर्व कहा कि दोनों देश नए और ज्यादा परिपक्व संबंधों के दौर की ओर बढ़ रहे हैं। कृष्णा ने कहा कि दोनों देश आपसी संबंधों को लेकर जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं उनमें पेचीदिगियां स्वाभाविक हैं। लेकिन हम आगे बढते जा रहे हैं। क्लिंटन ने खुली, मुक्त और पारदर्शी वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। दोनों देश दक्षिण एशिया और एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और दूसरी वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ साझे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के महत्व को भी दोनों देश बखूबी समझते हैं। ईरान से आयात कम करने के लिए ठोकी पीठ ईरान से कच्चे तेल का आयात कम करने के लिए क्लिंटन ने भारत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सहयोग बढ़ाने का यह नतीजा है। भरोसा हासिल करेंगे: कृष्णा भारत-अमेरिका बिजनेस काउंसिल की बैठक में कृष्णा ने कहा कि भारत विकास की अपेक्षित दर और निवेशकों का भरोसा हासिल कर लेगा। बैठक में देश में धीमी होती अर्थव्यवस्था और अनिश्चित व्यावसायिक माहौल को लेकर चिंताएं जाहिर की गई थीं। कृष्णा ने अमेरिकी निवेशकों को भारत आने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब अमेरिका भारत के साथ रक्षा सौदों में निवेश से कतराता था। लेकिन आज दोनों देशों के बीच भरोसा कायम हुआ है और आज हम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।