24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तान के खिलाफ नहीं भारत-अफगान-अमेरिका समझौता
16-06-2012

वाशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान की चिंता को दूर करते हुए कहा है कि भारत-अमेरिका-अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता पाकिस्तान के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में स्थायित्व लाना और आर्थिक विकास के लक्ष्य के लिए कदम उठाना है। यह बात ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कही। दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक मंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने कहा, निश्चित तौर पर इसे किसी भी तरह से पाकिस्तान के खिलाफ नहीं समझा जाना चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, इस समझौते का उद्देश्य अफगानिस्तान की स्थितियों पर चर्चा करना और उसे सहयोग देने पर केंद्रित था। उन्होंने कहा, और तीन महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं जिसमें न केवल सुरक्षा बदलाव बल्कि राजनीतिक बदलाव भी है क्योंकि अफगानिस्तान में 2014 में महत्वपूर्ण चुनाव होने हैं। इसके साथ ही आर्थिक बदलाव पर हमारा जोर तो है ही। आने वाले हफ्तों में त्रिपक्षीय विचार-विमर्श की घोषणा होगी। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा, पाक के लश्कर ए तैयबा जैसे समूहों से होने वाले खतरों पर भारत की चिंताओं से अमेरिका सहमत है।उन्होंने कहा, उन समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हम पाकिस्तान को हमेशा से कहते रहे हैं। वहीं डेविड हेडली और तहव्वुर राणा तक भारतीय पहुंच के बारे में उन्होंन कहा कि यह न्याय मंत्रालय से पूछिए।चीन के साथ बेहतर रिश्तों के इच्छुकअमेरिका और भारत दोनों देश चीन के साथ बेहतर साझेदारी चाहते हैं। अमेरिका ने कहा है कि वह चीन के साथ बेहतर रिश्तों के लिए चीन के साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाना चाहता है। दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक मंत्री विलियम ब्लेक ने भारत और अमेरिका के बीच तीसरी रणनीतिक वार्ता की समाप्ति के एक दिन बाद यह बात कही। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, इस वार्ता में चीन पर विचार-विमर्श हुआ। हालांकि मैं यह नहीं कहता कि चीन ही हमारी बातचीत का मुख्य मुद्दा था। हमने अफगानिस्तान के अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा किया। ब्लेक ने कहा-भारत और अमेरिका दोनों चीन के साथ अच्छी और मजबूत साझेदारी चाहते हैं। उन्होंने कहा, हमें नहीं लगता कि हम चीन की कीमत पर अपनी रणनीतिक साझेदारी बना रहे हैं। हम दोनों ही चीन के साथ अलग-अलग संबंध रखना चाहते हैं। लेकिन इसके साथ ही हमने चीन के साथ द्विपक्षीय बातचीत की भी पेशकश की है। हमें उम्मीद है कि वह इसके लिए तैयार हो जाएगा।