18 February 2019



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कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है पत्रकार की हत्या
22-02-2012

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में पत्रकार चंद्रिका राय और उनके परिवार की हत्या के मामले में उमरिया जिले की कानून व्यवस्था पर तो सवाल उठे ही है साथ ही यह भी साफ हो गया है कि मैदानी अमले में तैनात अधिकारी चापलूस और अक्षम किस्म के हैं। जैसा कि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अपने बयान में कहा है कि स्व. राय लगातार खनिज माफिया के बारे में खबरें लिख रहे थे इसी कारण खनिज माफिया ने साजिशन ही उनकी हत्या को अंजाम दिया है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकार की हत्या के मामले को जिस गंभीरता से लिया है वह ठीक है लेकिन अफसोस तो इस बात का है जिलों में पदस्थ एसपी,कलेक्टर औऱ निचले स्तर के अधिकारी इस कदर भ्रष्ट और लापरवाह हो गए हैं कि अब उन्हें कानून व्यवस्था औऱ नियमें कायदों से ज्यादा रसूखदारों की चापलूसी की चिंता है। चंद्रिका राय की हत्या के मामले में होना तो यह चाहिए था कि मौजूदा एसपी,एडीशनल एसपी,सीएसपी तथा टीआई स्तर के लापरवाह अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर उनकी जांच की जाना चाहिए थी। आखिर गुंडे बदमाशों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई है कि वे अब मीडिया को भी खुले आम निशाना बना रहे हैं।  क्या यह प्रदेश के सत्ताधीशों के लिए गर्व करने का विषय है।