24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को बड़ा झटका
29-06-2012

न्यूयार्क। एक अमेरिकी अदालत ने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उस रासायनिक संयंत्र में दुर्घटना के कारण पर्यावरण को हुए नुकसान या प्रदूषण से जुड़े दावों के लिए यूनियन कार्बाइड या उसके पूर्व अध्यक्ष वारेन एंडरसन जिम्मेदार नहीं हैं। उसकी जिम्मेदारी भारतीय कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड [यूसीआइएल] की है। 2-3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में गैस लीक होना अब तक के भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना मानी जाती है। मैनहटन के जिला जज जॉन कीना ने उस मुकदमे को खारिज कर दिया जिसमें त्रासदी के कारण भोपाल संयंत्र के आसपास की मिट्टी और जल प्रदूषण के लिए यूनियन कार्बाइड को जिम्मेदार ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि मूल कंपनी यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन [यूसीसी] और एंडरसन पर्यावरण को हुई क्षति या प्रदूषण से जुड़े दावों की भरपाई के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। यूसीआइएल उत्पादन और कचरे के निष्पादन के लिए जिम्मेदार थी। पेयजल प्रदूषित होने की जिम्मेदारी मूल कंपनी यूसीसी की नहीं थी। इसलिए इसका दायित्व मध्य प्रदेश सरकार का है। याचिकाकर्ता जानकी बाई साहू और अन्य ने कहा था कि भूजल में जहरीला पदार्थ फैलने से भोपाल स्थित इस संयंत्र के आसपास का पेयजल प्रदूषित हो गया। फैसले में कहा गया है कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे ये संकेत मिलते हों कि यूसीआइएल कीटनाशकों का निर्माण यूसीसी के लिए करती थी या उसका ऐसा अनुबंध था या यूसीसी के नाम से उसने काम किया। फैसले में कहा गया है कि यूसीसी सीधे तौर पर जवाबदेह नहीं है। वह यूसीआइएल के एजेंट के रूप में भी जवाबदेह नहीं है। कोर्ट ने 1998 के केएफसी से जुड़े अदालत के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि महज यह दावा करने से कि कॉरपोरेट अपनी अनुषंगी कंपनी के निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल था या वह उसकी नीतियों का नियंत्रित करता था इससे उसकी जवाबदेही तय नहीं की जा सकती। अदालत ने पाया कि वर्ष 1984 में त्रासदी के बाद भारत सरकार ने भोपाल संयंत्र को बंद कर दिया। 1994 में यूसीसी ने अपनी हिस्सेदारी यूसीआइएल को बेच दी। इसके बाद यूसीआइएल ने 1998 में इसका नाम बदलकर एवरेडी इंडस्ट्रीज इंडिया लि. कर दिया। इस कंपनी ने मप्र सरकार के साथ भोपाल संयंत्र और उसके आसपास की संपत्ति की अपनी लीज खत्म करा ली।