19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
मुर्सी सेना से टक्कर लेने को तैयार
03-07-2012

काहिरा . मिस्र के राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी अब सेना से भी टक्कर लेने को तैयार हैं। उन्होंने सोमवार को कहा कि वे फौजी शासन द्वारा भंग संसद को बहाल करने की कोशिश करेंगे। राजनीतिक बंदियों को रिहा करवाएंगे। शपथ लेने से पहले ही वे कह चुके हैं कि राष्ट्रपति को दिए गए सभी अधिकारों का पूरा इस्तेमाल करेंगे। हुस्नी मुबारक का तख्ता पलटे जाने के बाद मुर्सी मिस्र में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए पहले राष्ट्रपति हैं। सेना से डील के बाद उन्हें राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी हुई है। उन्होंने सेना को भरोसा दिलवाया था कि अगर उन्हें राष्ट्रपति बनवाया गया तो वे तहरीर चौक पर जमा आंदोलनकारियों को घर भेज देंगे। मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता रहे मुर्सी ने राष्ट्रपति कार्यालय में अपने मातहतों को आदेश दिए हैं कि संसद को बहाल करने और राजनीतिक बंदियों को रिहा करवाने के तरीके खोजे जाएं। क्यों हुई थी संसद भंग : मिस्र के शीर्षस्थ कोर्ट ने कहा था कि संसदीय चुनाव के लिए जारी आदेश कानून सम्मत नहीं थे। इसलिए चुनाव असंवैधानिक हैं। इसके अगले ही दिन फौजी शासन परिषद ने संसद को भंग कर दिया था। पलटे मुर्सी : शपथ लेने के तत्काल बाद शनिवार को मुर्सी ने काहिरा विश्वविद्यालय में पहला भाषण दिया था। उसमें उन्होंने सेना की तारीफ की थी। शायद इसलिए कि सेना की वजह से ही वे राष्ट्रपति बन पाए। सोमवार को वे सेना से टकराव के मूड में आ गए। क्योंकि अब देश की सत्ता उनके हाथ में है तथा वे सारे अधिकार अपने पास रखना चाहते हैं। सेना को सलाह : मुर्सी ने सेना को सलाह दी है कि अब वह सत्ता में भागीदारी छोड़ कर सीमा पर मोर्चा संभाले क्योंकि वही उसकी असली जगह है। क्या होगा संसद बहाल होने से : भंग संसद में इस्लामी कट्टरपंथी मुस्लिम ब्रदरहुड का बहुमत था। उसके बहाल होने से फौजी ताकत के खिलाफ कानून या प्रस्ताव पारित किए जा सकेंगे। मुर्सी मुस्लिम ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के उम्मीदवार थे। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने दोनों को छोड़ने की घोषणा की है। सेना की दलील : सैन्य परिषद स्काफ के प्रमुख मुहम्मद हुसैन ने कहा है कि इस साल के अंत तक नई संसद को शपथ दिलवाने के बाद वह सत्ता में भागीदारी से हट जाएगी। 48 घंटे में नई सरकार : मुर्सी को नया मंत्रिमंडल बनाने के लिए 48 घंटे का समय मिला है। विभिन्न राजनेताओं ने उनसे मांग की है कि वे अपने मूल राजनीतिक दल के अलावा अन्य दलों के नेताओं को भी इसमें स्थान दें।