19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
फुकुशिमा परमाणु संयंत्र त्रासदी मानवजनित आपदा करार
06-07-2012

टोक्यो। जापान की संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में पिछले वर्ष फुकुशिमा परमाणु संयंत्र त्रासदी को 'मानवजनित आपदा' करार दिया है। साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री नाओतो कॉन सरकार की भी कड़ी आलोचना की है। समिति ने गुरवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की।फुकुशिमा दुर्घटना की जांच के लिए गठित डायट के फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना स्वतंत्र जांच आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है, 'मार्च 2011 में हुई दुर्घटना को 'प्राकृतिक आपदा नहीं माना जा सकता।' यह पूरी तरह से मानवजनित आपदा थी, जिसके विषय में पहले से ही अनुमान लगाया जा सकता था और अनुमान लगाना चाहिए। इसे रोका जा सकता था।'मई 2011 में गठित समिति ने कहा कि सरकार एवं संयंत्र की संचालक टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (टेपको) बचाव के लिए पर्याप्त उपाय करने में विफल रही और साथ ही उसमें 'लोगों को बचाने के लिए जिम्मेदारी का अहसास' नहीं था।पिछले वर्ष जापान में रिक्टर पैमाने पर नौ डिग्री की तीव्रता के भूकंप एवं इसके बाद आई सुनामी से संयंत्र का शीतलक यंत्र बंद हो गया था जिससे रिएक्टर पिघलने लगा। संयंत्र के आसपास रहने वाले हजारों लोगों को वहां से सुरक्षित अन्य स्थानों पर भेजा गया था।क्यों कहलाई मानव त्रासदी- 11 मार्च 2011 को जापान में आया था विनाशकारी भूकंप और सुनामी- 20 हजार लोगों की मौत- फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र को सबसे अधिक नुकसान हुआ था- छह रिएक्टर तुरंत बंद कर दिए गए थे- रेडियोधर्मी रिसाव से फैली थी दहशत - जान बचाने के लिए हजारों लोगों को करना पड़ा था पलायन- मामले की जांच के लिए संसदीय समिति का गठन - समिति ने पाया की हादसे के बाद बरती गई लापरवाहियों से उठाना पड़ा खामियाजा - इस घटना के बाद देश के 50 परमाणु संयंत्र बंद कर दिए गए थे बिजली की किल्लत बढ़ी देश में बिजली की भारी किल्लत को देखते हुए प्रधानमंत्री योशिहिको नाडो ने भारी विरोध के बाद पिछले महीने दो परमाणु संयंत्रों को शुरू करने की घोषणा की थी। उनका कहना है कि हम इन संयंत्रों पर पूरी नजर रखे हैं। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि देश में किसी तरह की अनहोनी न हो इस पर ध्यान दिया जा रहा है, मगर देश में बिजली आपूर्ति में कमी को लेकर सरकार को यह निर्णय करना पड़ा है।