16 February 2019



राष्ट्रीय
केंद्र सरकार नरेगा के भ्रष्टाचार पर नरम
07-07-2012

नई दिल्ली। सोनिया गांधी की नेतृत्ववाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने शुक्रवार को खेद जताया कि संप्रग के अग्रणी कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (नरेगा) को लेकर शुरुआती उत्साह की जगह अब चुनौतियों ने ले ली है। इसकी सदस्य अरुणा राय ने आरोप लगाया कि इसके भ्रष्टाचार साबित हो चुके मामलों में भी सरकार नरम रुख दिखा रही है। उन्होंने एनएसी अध्यक्ष सोनिया गांधी से ह्विसलब्लोअर्स रक्षा एवं शिकायत निवारण विधेयक को भी संसद से जल्द पारित कराने का आग्रह किया। राय ने कहा कि इसमें विलंब से ऐसी धारणा बनेगी कि सरकार दायित्व एवं भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर नहीं है।सरकार की आलोचना करते हुए राय ने एनएसी अध्यक्ष सोनिया गांधी से निवेदन किया है कि महात्मा गांधी नरेगा में निचले स्तर पर प्रशासनिक नाकामी की जांच के लिए कोई गंभीर तंत्र नहीं है। हाल में पुनर्गठित एनएसी की बैठक में कहा गया की बहुत प्रभावशाली उपलब्धियों के बावजूद इसकी इस बात को लेकर बहुत आलोचना हो रही है कि यह सही मूल्यांकन पर आधारित नहीं हैं। बैठक के बाद एनएसी ने एक बयान में कहा कि महात्मा गांधी नरेगा की भूमिका की बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ समय के शुरुआती उत्साह और उल्लेखनीय प्रगति के बाद के बाद यह कानून बुनियादी स्तर पर लागू होने में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस कार्यक्रम के लाभान्वितों को बुनियादी अधिकार देने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा है कि मनरेगा के तहत बुनियादी अधिकारों को यथार्थ में बदलते देखने के लिए सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर से बहुत कड़ी प्रतिबद्धता दिखाने और संकेत देने की जरूरत है। नए दिशानिर्देश लागू किए जाने चाहिए लेकिन इससे भी आगे जाने की जरूरत है। नरेगा को लागू करने का मुद्दा मूल्यांकन के लिए शुक्रवार को परिषद के समक्ष पेश हुआ। सदस्यों ने पाया कि मानसून के नाकाम रहने व सूखे की स्थिति को देखते हुए कई राज्यों में सार्वजनिक कार्य बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।