22 February 2019



राष्ट्रीय
सपा द्वारा प्रणब का समर्थन करने पर मिला केन्द्र से फायदा
11-07-2012

नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव में केंद्र के साथ ममता बनर्जी की आखमिचौली ने सपा से उसकी दोस्ती और पक्की कर दी। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए 50 हजार करोड़ के आर्थिक पैकेज पर मोहर लगाकर सपा द्वारा राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर प्रणब मुखर्जी का समर्थन करने का एहसान चुकता कर दिया है। मायावती सरकार जिस केंद्र से पाच साल तक प्रदेश के लिए 80 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मागती रह गई, उसी केंद्र से अखिलेश सरकार ने महज तीन घटे में 50 हजार करोड़ से अधिक की मदद के लिए हा करवा ली। यही नहीं, आगे चलकर बाकी के लिए भी वादा करा लिया।बीते पाच साल के इतिहास में मंगलवार को यह पहला मौका था, जब केंद्र और उप्र के लगभग दो दर्जन अफसरों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में तीन घटे तक सिर्फ उत्तर प्रदेश के विकास के लिए खजाना खोलने के रास्तों पर माथापच्ची की। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन की मौजूदगी में हुई इस बैठक में तमाम योजनाओं और कार्यक्त्रमों में केंद्रीय सहायता के लिए हरी झडी मिल गई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीते अप्रैल में ही प्रधानमंत्री से मिलकर प्रदेश के विकास के लिए उन्हें 38 पत्र सौंपकर मदद की गुहार की थी। वे मागें लगभग 93 हजार करोड़ की थीं। सूत्रों की मानें तो उनमें 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की मागों को केंद्र ने हरी झडी दे दी है। जो बाकी मागें हैं, उन्हें भी 12वीं पंचवर्षीय योजना में पूरा करने का भरोसा दिया है। बड़े फैसलों में सिंचाई के मद्देनजर केंद्र ने एक झटके में ही सात हजार 270 करोड़ रुपये की सरयू नहर परियोजना व 319 करोड़ रुपये की शारदा सहायक क्षमता पुनसर्थापना परियोजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने की हामी भर दी। अब इस खर्च का 90 प्रतिशत बोझ केंद्र व दस प्रतिशत उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र ने अखिलेश की माग पर राज्य में नौ नये विश्वविद्यालयों को खोलने के लिए मदद पर रजामंदी दे दी है। अनुसूचित जाति के छात्रों के वजीफे के लिए प्रदेश ने चार हजार पाच सौ करोड़ मागे थे। केंद्र वह भी देगा। साथ ही रायबरेली (लालगंज) में एम्स के लिए जमीन की पड़ताल के लिए जल्द ही केंद्रीय टीम भेजने का भरोसा दिया है। अखिलेश ने 2013 में इलाहाबाद कुंभ मेले के लिए चार सौ करोड़ रुपये मागे थे। सूत्र बताते हैं कि इस मद में पाच सौ से छह सौ करोड़ रुपये भी मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भी केंद्र ने बुंदेलखंड के लिए नियमों को शिथिल कर दिया है। कृषि उत्पादन से जुड़े मामलों में केंद्र ने खास दरियादिली दिखाई है। कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन मानते हैं कि केंद्र के इस कदम में उत्तर प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में भारी बदलाव होना लाजिमी है। केंद्र ने सहकारी बैंकों के मामले में वैद्यनाथन कमेटी की सिफारिशों की रोशनी में 922 करोड़ रुपये भुगतान की मंजूरी दे दी है। जबकि, अभी 26 लाख टन के अलावा तीन लाख टन अतिरिक्त उर्वरक भी देने का भरोसा दिया है। पशुओं के खुरपका रोग के उपचार के लिए अभी 17 जिलों को मिलने वाली केंद्रीय मदद अब सभी जिलों को शत-प्रतिशत मिलेगी। गावों में भी पाइप के जरिये पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अगले दस साल में (2022 तक) सात हजार करोड़ की दरकार है। केंद्र ने मदद भरोसा दिया है। जबकि आर्सेनिक वाले क्षेत्रों में तीन हजार करोड़ की माग है। केंद्र ने फिलहाल तीन लाख 86 हजार और इंदिरा आवास का भरोसा दिया है।केंद्र सरकार द्वारा दिए गए पैकेज में लगभग 9880 करोड़ रुपये का पैकेज बाढ़ राहत और सिंचाई के लिए दिया गया है।