19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
नया अवमानना विधेयक पाक में मंजूर
11-07-2012

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली ने अवमानना से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके तहत शीर्ष नेताओं को अदालती अवमानना के मामलों से मुक्त करने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के बाद प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा खोले जाने को लेकर पड़ रहे सुप्रीम कोर्ट के दबाव में कमी आएगी। कानून मंत्री फारुक एच नाइक ने सोमवार रात शोर-शराबे के बीच नेशनल असेंबली में अदालती अवमानना विधेयक 2012 पेश किया। संक्षिप्त बहस के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया गया। मुख्य विपक्षी पीएमएल ने हालांकि इसका विरोध किया। खास सत्र बुलाया गया : जरदारी ने इस विधेयक को पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया था। अब इसे संसद के ऊपरी सदन सीनेट में पेश किया जाएगा। सीनेट में इसके पारित होने की पूरी संभावना है, क्योंकि संसद के ऊपरी सदन में सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का बहुमत है। सरकार की कोशिश है कि 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की समीक्षा किए जाने से पहले इस विधेयक को दोनों सदनों से पारित करा लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री को यह बताने के लिए गुरुवार तक का समय दिया है कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को दोबारा खोलेंगे या नहीं। यूसुफ रजा गिलानी को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा नहीं खोलने के मामले में 26 अप्रैल को अदालत की अवमानना का दोषी करार देते हुए प्रधानमंत्री पद और नेशनल असेंबली की सदस्यता के लिए अयोग्य करार दिया था। क्या हुआ बदलाव-प्रस्तावित कानून के तहत किसी भी जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जा सकेगी। ये कदम अदालती अवमानना के दायरे में नहीं आएगा। -अदालती अवमानना से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ अपील की अवधि को 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन कर दिया गया है। -सरकार से जुड़े शीर्ष अधिकारियों को सरकारी फैसलों पर कानूनी कार्यवाही से संरक्षण मिलेगा।