16 February 2019



राष्ट्रीय
एनसीटीसी को आइबी के दायरे से बाहर करने का प्रस्ताव
12-07-2012

नई दिल्ली। राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र यानी एनसीटीसी पर राज्यों के विरोध का स्वर नरम करने के लिए गृह मंत्रालय ने एनसीटीसी को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आइबी) के दायरे से बाहर करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह एक ऐसा बिंदु था जिस पर इस आतंक निरोधक संस्था का मामला फंसा हुआ था। नए प्रस्ताव में राज्य पुलिस के साथ तालमेल बैठाकर एनसीटीसी के काम करने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस)की बैठक में पेश किया जा सकता है। एनसीटीसी पर पांच मई को विशेष रूप से बुलाई गई बैठक में केंद्र सरकार को मुख्यमंत्रियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। उसी के बाद गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस परियोजना को आइबी के दायरे से बाहर करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे पूर्व के प्रस्ताव में मल्टी एजेंसी सेंटर और आइबी के ऑपरेशन विंग एनसीटीसी के लिए चिह्नित किए गए थे। गृह मंत्रालय ने एक नई आतंकवाद निरोधक संस्था बनाने के लिए अध्यादेश पारित किया था। इस अध्यादेश का ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जोरदार विरोध किया था। इनका कहना था कि एनसीसीटी को एक स्वंतत्र संस्था बनाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, सीसीएस की बैठक में गुरुवार को जो नया प्रस्ताव पेश किया जाना है उसके अनुसार एनसीटीसी राज्य पुलिस को विश्वास में लेकर काम करेगी। बगैर नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित किए कोई भी गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इस बारे में राज्य सरकारों का कहना था कि उन्हें बगैर सूचित किए किसी की गिरफ्तारी का अधिकार एनसीटीसी को देने से देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। चिदंबरम ने एक दिन पहले ही संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि सीसीएस के सदस्यों को विचार के लिए एनसीटीसी पर नोट वितरित किया जा रहा है।