19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
रूसी संसद का इंटरनेट सेंसरशिप से जुड़े एक विवादास्पद बिल के पक्ष में मतदान
12-07-2012

मास्को। रूसी संसद ने इंटरनेट सेंसरशिप से जुड़े एक विवादास्पद बिल के पक्ष में मतदान कर दिया है। इस बिल के बारे में कुछ सक्रिय कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह उन वेबसाइट्स को प्रतिबंधित कर सकता है, जो सरकार को अवाछित लगती हैं।इसी से जुड़ा एक अन्य विवादास्पद कदम उठाते हुए अधिकारियों ने बुधवार को एक ऐसा बिल भी पास कर दिया, जो किसी भी लिखित या मौखिक अपराधिक प्रयास करने वाले को पाच साल तक की सजा का प्रावधान करता है।कम्युनिस्ट उपायुक्त एनाटोली लोकोत का मानना है कि इन नियमों का उद्देश्य रूस में से विरोध के स्वरों को बिल्कुल खत्म कर देना है। इन दोनों ही नियमों का विरोध किया जा रहा है, क्योंकि इनका इस्तेमाल सरकार विपक्ष के खिलाफ कर सकती है। इसके लिए वह विरोध प्रदर्शनों पर जुर्माना बढ़ा सकती है और गैर सरकारी संस्थाओं को विदेशों से मिलने वाली आर्थिक मदद को वह विदेशी हाथ बताकर प्रतिबंधित भी कर सकती है। रूसी संसद में बहुमत प्राप्त यूनाइटेड रशिया जिस तेजी से ये नियम ला रही है, उसकी आलोचना कई कानूनविद् कर रहे हैं। इन नियमों के विरोध में एक दिन पहले ही रूसी भाषा का विकीपीडिया हड़ताल पर रहा। इस बिल को इस तरह प्रचारित किया जा रहा है कि यह बच्चों की पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने के लिए है। इसके लिए काली सूची में डाली गई वेबसाइट्स का रिकॉर्ड रखा जाएगा और उनके मालिकों को उसे बंद करने के लिए कहा जाएगा। अमेरिका ने भी इन नियमों के बारे में आपत्ति जताई है। अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के प्रवक्ता पेट्रिक वेंट्रेल ने उनके हवाले से कहा, कि सूचनाओं और विचारों को प्राप्त करना और उनका आदान-प्रदान करना मानवाधिकारों के अंतर्गत आता है। मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में इसकी गारंटी दी गई हैं। इन नियमों पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हस्ताक्षर होने के बाद नवंबर में ये कानून के रूप में लागू हो सकते हैं।