19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
तालिबान के 70 प्रतिशत लोग अलकायदा से नाराज
12-07-2012

काबुल। तालिबान के एक वरिष्ठ कमांडर ने स्वीकार किया है कि अफगानिस्तान में लड़ाके अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन से युद्ध जीत नहीं सकते हैं। साथ ही कहा कि काबुल पर दोबारा सत्तासीन होना आसान नहीं है। इसलिए देश की राजनीतिक शक्तियों के साथ समझौता करना जरूरी है।न्यू स्टे्टमैन अखबार को दिए साक्षात्कार में कमांडर ने कहा,'तालिबान के 70 प्रतिशत लोग अलकायदा से नाराज हैं। हमारे लोग अलकायदा को दैवी विपत्ति की तरह मानते हैं। सच कहूं तो अलकायदा के पूर्व सरगना ओसामा बिन लादेन के मारे जाने पर मुझे बहुत सुकून मिला था, क्योंकि अपनी नीतियों से उसने अफगानिस्तान को तबाह कर डाला। अगर वह वाकई जिहाद में विश्वास करता था तो उसे सऊदी अरब जाना चाहिए था। हमारे देश को बर्बाद नहीं करना चाहिए था।' अखबार ने कमांडर की पहचान को उजागर नहीं किया है। उसे मलवी नाम से संबोधित किया गया है। यह साक्षात्कार तालिबान शासन के दौरान काबुल में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल सेंपले ने लिया है। वह तालिबान नेतृत्व के संपर्क में रहते हैं। फिलहाल माइकल हार्वर्ड के कार सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स पालिसी से जुड़े हुए हैं। मलवी ने कहा, 'काबुल पर कब्जा करना तालिबान के लिए आसान नहीं है। अगर कोई तालिबान नेता काबुल पर कब्जा करने की उम्मीद लगाए है तो वह बहुत बड़ी गफलत में जी रहा है। नेतृत्व इस सच्चाई से वाकिफ है कि सत्ता पर काबिज होना आसान नहीं है। यही वजह है कि तालिबान ने अफगानिस्तान को पुन: कट्टरपंथी इस्लामिक देश बनाने का ख्वाब छोड़ दिया है जो उसने 1996 से 2001 के अपने शासनकाल के दौरान स्थापित किया था।' उसने स्वीकार किया कि तालिबान अगर देश की सत्ता पर दोबारा काबिज नहीं हो पाता है तो वह देश में एक संगठित पार्टी का गठन करेगा। उल्लेखनीय है कि इस साल की शुरुआत में तालिबान ने अपने प्रतिनिधियों को अमेरिका के साथ शांति वार्ता करने के लिए कतर भेजा था। मगर यह वार्ता नाकाम रही थी। पिछले हफ्ते क्योटो में अपने प्रतिनिधि दल को मेलमिलाप सम्मेलन में भेजा था। इससे संकेत मिला था कि तालिबान वार्ता का इच्छुक है।