19 February 2019



राष्ट्रीय
डेनमार्क सरकार बेनकाब
13-07-2012

नई दिल्ली। पुरुलिया में हथियार गिराने के मुख्य आरोपी किम डेवी के प्रत्यर्पण मामले में डेनमार्क सरकार बेनकाब हो गई है। डेवी के प्रत्यर्पण के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती न देने के फैसले की जिम्मेदारी डेनिस सरकार भले ही अपने प्रासीक्यूटर पर डाल रही है, लेकिन डेनमार्क की निजी कानूनी सलाहकार फर्मो ने सरकारी दलील को खारिज कर दिया है। इनका कहना है कि डेनमार्क सरकार चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है और इसमें कोई कानूनी बाधा नहीं है। डेनमार्क के रवैये से नाराज भारत सरकार ने अपने अफसरों को डेनिस राजनयिक या प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलने की सलाह दी है। डेवी के प्रत्यर्पण के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने से डेनमार्क सरकार और वहां के प्रासीक्यूटर के इन्कार के बाद भारत ने निजी डेनिस फर्मो से कानूनी सलाह लेने का फैसला किया था। डेनिस फर्मो के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए प्रासीक्यूटर कोई बाधा नहीं है और डेनमार्क सरकार चाहे तो अपने स्तर पर यह काम कर सकती है। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक डेनिस सरकार और प्रासीक्यूटर डेवी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। डेनिस फर्मो की राय सामने आने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने गृह मंत्रालय की सलाह पर एक सर्कु लर जारी किया है। इसमें भारतीय अफसरों को किसी भी डेनिस राजनयिक या प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलने की सलाह दी गई है। गौरतलब है कि पहले डेनमार्क की निचली अदालत ने भारतीय जेलों की स्थिति को खराब बताते हुए डेवी के प्रत्यर्पण से इन्कार कर दिया था। बाद में वहां की हाई कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी थी। भारत हाई कोर्ट के फैसले को वहीं के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना चाहता है। इसके लिए सीबीआइ की टीम गत माह प्रासीक्यूटर को समझाने डेनमार्क गई थी। भारत डेवी को जेल के बजाय किसी अन्य स्थान पर रखकर मुकदमा चलाने की पेशकश भी कर चुका है, लेकिन डेनमार्क सरकार और प्रासीक्यूटर सुप्रीम कोर्ट में अपील को तैयार नहीं हैं।