19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
फेसबुक बना अपराधियों और जासूसों का ठिकाना
13-07-2012

सैन फ्रांसिस्को। मेल-जोल बढ़ाने का मंच बनी सोशल साइटें जिस तेजी से अपराधियों और जासूसों का ठिकाना बनती जा रही हैं, उसी तीव्रता से उनके खिलाफ लड़ने के लिए सॉफ्टवेयर के रूप में हथियार भी तैयार हो रहे हैं। पुलिस 13 साल की बच्ची पर बुरी नजर रखने वाले एक शख्स को फेसबुक के ऐसे ही एक सॉफ्टवेयर की मदद से गिरफ्तार करने में कामयाब हुई है।यह सॉफ्टवेयर चैटिंग में अश्लील भाषा के इस्तेमाल पर अलर्ट जारी करता है। इससे अधिकारी उस पर नजर रखना शुरू कर देते हैं और मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस को सूचित कर दिया जाता है। ऐसे ही एक मामले में तीस साल की उम्र का एक व्यक्ति 13 साल की लड़की से चैटिंग कर रहा था। दोनों के बीच सेक्स संबंधी मैसेज का आदान-प्रदान हो रहा था। इस दौरान उस व्यक्ति ने लड़की को एक खास जगह मिलने के लिए भी राजी कर लिया। इस पर चौकन्ने हुए फेसबुक के अधिकारी ने पुलिस को खबर की और वह व्यक्ति अपराध करने से पहले ही पकड़ा गया।इन दिनों फेसबुक के जरिए कम उम्र की लड़कियों से दोस्ती कर उनका यौन शोषण करने और कई मामलों में हत्या कर दिए जाने के खबरें आ रही हैं। इसके मद्देनजर यह सॉफ्टवेयर पुलिस के लिए बड़े काम का साबित हो रहा है। हालांकि इसकी कीमत ज्यादा है लेकिन इसके फायदे को देखते हुए फेसबुक ने इसे अपने सिस्टम में शामिल किया है। फ्लोरिडा लॉ डिपार्टमेंट के एक अधिकारी कहते हैं कि जिस तेजी से फेसबुक ने हमें सूचना दी, उससे हमें कार्रवाई करने में सहूलियत हुई।बच्चों पर रखें नजर-बच्चे की ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में उससे बात करें। उस दौरान साथ बैठें। कुछ आपत्तिाजनक मिलने पर डांटे नहीं, समझाएं-सेफ्टी सॉफ्टवेयर के बारे में जानने के लिएनेट्सस्मा‌र्ट्ज411डॉटओआरजी,गेटनेटवाइजडॉटओआरजी जैसे साइट देखें और खुद की जानकारी बढ़ाएं-बच्चे के स्मार्टफोन से लोकेशन सर्विस की सुविधा खत्म करा दें-बच्चे को समझाएं कि नेट पर उसने जिसके साथ संपर्क किया है, जरूरी नहीं कि वह वही व्यक्ति हो। अपराधी फर्जी नाम और उम्र के साथ सक्रिय हैं-सुनिश्चित करें कि बच्चे ने नेटवर्क साइट पर सही उम्र दर्ज की है और नाम, पता, फोन नंबर एवं पासवर्ड शेयर नहीं किया है।