19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
सुनीता विलियम्स निकली इतिहास रचने
16-07-2012

बैकानूर। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स नया इतिहास रचने निकल पड़ी हैं। 46 वर्षीय सुनीता दूसरी अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना हो गई हैं। इस बार वह करीब चार महीने तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन [आइएसएस] पर रहेंगीं। रूस के सोयूज यान ने भारतीय समयानुसार रविवार सुबह आठ बजकर दस मिनट पर सुनीता समेत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर कजाखिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। सोयूज के मंगलवार सुबह आइएसएस से जुड़ने की संभावना है। अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय तक रहने वाली महिला का रिकॉर्ड सुनीता के ही नाम है। ओहायो में जन्मीं सुनीता 2006-07 में अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा के दौरान 195 दिन तक आइएसएस में रही थीं। अब वह छह वर्षो के अंतराल में अंतरिक्ष में दोबारा जाने वाली पहली महिला बन गई हैं। सुनीता के साथ इस यात्रा पर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के यूरी मालेनचेंको और जापान की एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के फ्लाइट इंजीनियर अकीहिको होशिदे गए हैं। सोयूज के कमांडर मालेनचेंको रूस के सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं। उनकी यह पांचवीं अंतरिक्ष यात्रा है। सुनीता की तरह होशिदे की भी यह दूसरी अंतरिक्ष यात्रा हैं। आइएसएस पर इस दल का अभियान करीब चार महीने का है। नवंबर मध्य में धरती पर लौटने से पहले यह दल 30 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा। यह दल आइएसएस पर पहले से ही मौजूद रूसी अंतरिक्ष यात्री गेन्नाडी पडालका व सर्गेई रेविन और नासा के जॉय अकाबा से मिलेगा। तीनों 17 मई से आइएसएस पर हैं। सभी छह अंतरिक्ष यात्री करीब दो महीने तक साथ काम करेंगे। इस दौरान सुनीता आइएसएस के एक्सपीडिशन (अभियान)-32 के फ्लाइट इंजीनियर की जिम्मेदारी संभालेंगीं। अकाबा, पडालका और रेविन का 17 सितंबर को पृथ्वी पर लौटने का कार्यक्रम है। इसके बाद सुनीता एक्सपीडिशन-33 के कमांडर के रूप में काम करेंगीं। सुनीता के पिता गुजरात के रहने वाले हैं। सुनीता पहले पशु चिकित्सक बनना चाहती थीं, लेकिन बाद में उनकी दिलचस्पी अंतरिक्ष विज्ञान में बढ़ी। 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर डिग्री करने के बाद 1998 में वह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी 'नासा' से जुड़ गईं।ओलंपिक देखने को बेताब सुनीता विलियम्स 27 जुलाई से प्रारंभ हो रहे लंदन ओलंपिक खेलों को आइएसएस से देखने के प्रति उत्साहित हैं। उड़ान से पहले एक इंटरव्यू में सुनीता ने कहा, वैश्विक सहयोग बढ़ाने के आइएसएस के लक्ष्य और ओलंपिक की विचारधारा में समानता है। ओलंपिक भी विभिन्न देशों के बीच मित्रता को बढ़ावा देता है। इस अभियान से अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर दीर्घकालिक सहयोग की जमीन तैयार हुई है।