19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
कश्मीर मसला नहीं सुलझा सकता तीसरा देश
16-07-2012

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों का समाधान दोनों देशों द्वारा ही निकाला जा सकता है। उन्होंने बाहर से किसी समाधान थोपे जाने की संभावना से इनकार किया है।भारत-पाक वार्ता प्रक्रिया का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, अमेरिका सहित किसी भी देश के लिए बाहर से समाधान थोपना आसान नहीं होगा। अशांत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अहितकर बताते हुए उन्होंने कहा कि हम सब ऐसा पाकिस्तान चाहते हैं, जो स्थिर, खुशहाल और लोकतांत्रिक हो। ओबामा ने कहा कि अमेरिका ऐसी किसी भी बातचीत का समर्थन करेगा, जो भारत-पाक के बीच तनाव को कम करते हों। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और संपर्क बढऩे से अधिक खुशहाली आ सकती है।अफगान के भविष्य के लिए भारत महत्वपूर्ण वे अफगानिस्तान के भविष्य, भारत की भूमिका के साथ ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी रणनीति से जुड़े सवालों पर भी संवाददाता सम्मेलन में जमकर बोले। अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अफगानिस्तान के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण देश है। अफगान पुलिस को प्रशिक्षण देने, विकास संवर्धन और जीवन स्तर को भारत की मदद से सुधारा जा सकता है।उन्होंने कहा कि भारत, अफगानिस्तान के साथ रणनीतिक समझौता करने वाला पहला देश है। अफगान में सरकारी संस्थानों को मजबूत करने में भारत की प्रशासनिक सेवा एक मॉडल का काम करेगी। ओबामा ने कहा कि अफगान में निजी निवेश पर सम्मेलन का आयोजन कर भारत ने देश के आर्थिक विकास में तत्परता दिखाई है। शांतिपूर्ण और खुशहाल चीन का स्वागत इस सवाल पर कि अमेरिका क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए भारत को लाना चाहता है, उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास किसी देश को ध्यान में रखकर नहीं किया जा रहा है। एक दशक तक हमारा ध्यान इराक और अफगान पर केंद्रित था। इसके बाद हमने फैसला लिया कि अमेरिका एशिया के भविष्य निर्धारण में एक बड़ी भूमिका निभाएगा।अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, अमेरिका शांतिपूर्ण और खुशहाल चीन के उत्थान का स्वागत करता है, जो क्षेत्रीय, वैश्विक सुरक्षा, खुशहाली और शांति में योगदान दे। उन्होंने कहा, इसलिए हम चीन के साथ सहयोग चाहते हैं, ताकि हमारे बीच समझदारी बढ़े और गलत आकलन की नौबत न आए। चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। एक सुरक्षित, स्थायी और खुशहाल एशिया प्रशांत क्षेत्र ही पूरी दुनिया के हित में है।