18 February 2019



प्रादेशिक
मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में काला दिन
17-07-2012

मध्यप्रदेश विधानसभा में मंगलवार 17जुलाई का दिन इतिहास का सबसे काला दिन कहा जाएगा जब दिलीप सूर्यवंशी और अन्य ठेकेदारों के भ्रष्टाचार पर चर्चा कराए जाने को लेकर कांग्रेसी सदस्यों ने न केवल अध्यक्ष की आसंदी को घेर लिया बल्कि उस पर बैठे सभापति ज्ञान सिंह के साथ धक्कामुक्की की। सारे कांग्रेसी सदस्य गर्भ गृह से होते हुए आसंदी से झूम गए। कांग्रेसी विधायकों ने सभापति की टेबलपर मुक्के मारे और सदन की कार्रवाई चलाने से मना कर दिया। इस अभूतपूर्व हंगामे के बीच सदन की कार्रवाई कुछ देर के लिए स्थगित हो गई। इसके बाद सभापति के रूप में केदार शुक्ला ने सदन के संचालन की कोशिश की लेकिन कांग्रेसी सदस्यों के विरोध के चलते उन्होंने भी सदन की कार्रवाई को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया। मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस इस बार बिलकुल इस मूड में है कि सरकार या तो भ्रष्टाचार पर चर्चा कराए अन्य़था वे सदन की कार्रवाई नहीं चलने देंगे। पहली बार किसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सशक्त विपक्ष का रूप दिखाया है। इससे पहले कांग्रेस कई गुटों में बिखरी नजर आती थी। कांग्रेसी सदस्यों ने सत्र के पहले दिन सोमवार को भी काफी विरोध किया जिससे विधानसभा की कार्रवाई दो बार स्थगित हुई। मंगलवार को भी कांग्रेसी सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव व्यक्त करते हुए उन्हें सदन में जाने से रोका बाद में अध्यक्ष के बजाय सभापति के रूप में ज्ञानसिंह ने सदन का संचालन किया। इधर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस के कृत्य को लोकतंत्र की हत्या बताया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस मामले में कांग्रेस की निंदा की है। बीजेपी के विधायकों ने सदन में इस मामले में कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर आसंदी तक पहुंचने वाले विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने की मांग उठाई है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है कि बीजेपी सरकार ,भ्रष्टाचार के मुददे पर सदन में चर्चा से बचना चाहती है। पिछले अविश्वास प्रस्ताव में भी सरकार ने ऐसा ही किया और अब दिलीप सूर्यवंशी तथा अन्य बीजेपी नेताओं का भ्रष्टाचार कहीं जनता के सामने खुल न जाए इसीलिए सदन में चर्चा से बचा जा रहा है। कांग्रेसी सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के खिलाफ भी नारेबाजी की।