16 February 2019



राष्ट्रीय
सत्यमेव जयते का कमाल
17-07-2012

नई दिल्ली. दिल पे लगी तो बात बनी! अपने टीवी शो के जरिए सामाजिक बुराइयों के खिलाफ मुहिम चला रहे फिल्म अभिनेता आमिर खान ने जब सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक से मुलाकात कर उन्हें सिर पर मैला ढोने वालों की दुर्दशा से अवगत कराया तो आश्वसन मिला कि इस मुद्दे को सरकार प्राथमिकता देगी और कड़े प्रावधानों वाला मसौदा विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश करेगी। उधर मुम्बई में इसी मुद्दे को उठाते हुए सिर पर मैला ढोने वालों ने एक संगठन के नेतृत्व में प्रदर्शन किया।आमिर ने सोमवार सुबह 7, रेस कोर्स मार्ग स्थित प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर मनमोहन सिंह से और शास्त्री भवन स्थित कार्यालय में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक से मुलाकात की और इस कुरीति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार देश से मैला ढोने की प्रथा के जल्द से जल्द उन्मूलन के लिए कार्य करेगी बाद में आमिर ने वासनिक के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री और वासनिक दोनों इस मुद्दे से अवगत हैं और इस समस्या से निपटने के लिए यथासम्भव जल्द से जल्द प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, "वासनिक ने मुझे आश्वस्त किया कि उनका मंत्रालय इस मसले पर पहले से काम कर रहा है और उनका मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय दोनों मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने के लिए काम करेंगे।वहीं, वासनिक ने कहा, "हम मानते हैं कि हर इंसान को अपनी जिंदगी इज्जत के साथ जीने का अधिकार होना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह है कि आज भी समाज के एक तबके के लोग हाथ से मैला साफ करने का काम करते हैं, यह सिर्फ समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा, "मुझे खुशी हुई कि आमिर खान ने यह मुद्दा उठाया है और मुझे विश्वास है कि इस मुद्दे पर उन्होंने जो रास्ता सुझाया है, उससे समाज में जागरूकता पैदा करने में मदद मिलेगी और हम जल्द ही इस कुरीति से निजात पा लेंगे।"आमिर ने हालांकि कहा कि राज्य सरकारें इस समस्या को स्वीकार नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा, "कई राज्य सरकारों को पता ही नहीं है कि यह समस्या अभी भी मौजूद है। वे मैला ढोए जाने का कोई रिकार्ड नहीं रखते और दावा करते हैं कि यह समस्या है ही नहीं।"आमिर के मुताबिक, सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे को 'शीर्ष प्राथमिकता' देगी और इस संबंध में कड़े प्रावधानों वाला मसौदा विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश करेगी। ज्ञात हो कि 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 700,000 लोग सिर पर मैला ढोने के काम में लगे हैं। इनमें से 586,067 ग्रामीण इलाकों में और 2,08,323 शहरी इलाकों में हैं।आमिर से बातचीत के बाद वासनिक ने कहा, "हमें पता है कि यह समस्या अभी भी है और हम इसे शीर्ष प्राथमिकता पर रख रहे हैं। मैला ढोने वाले के रूप में नियुक्ति को प्रतिबंधित करने और ऐसे लोगों के पुनर्वास संबंधी विधेयक, 2012 का मसौदा संबंधित मंत्रालयों और विभागों में वितरित किया जा रहा है। हमारा इरादा इसे संसद के मानसून सत्र में पेश करने का है।"दूसरी ओर, मुम्बई में समूचे महाराष्ट्र से आए करीब 200 मैला ढोने वालों ने इस प्रथा को खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मैला ढोने के काम में लगे लोगों के नेता प्रदीप मोरे ने बताया कि सामाजिक संगठन 'कम्पेन अगेंस्ट मैनुअल स्कैविंजिंग इन महाराष्ट्र' की अगुवाई में वैसे तो नाम मात्र के प्रदर्शनकारी जुटे, लेकिन राज्य में मैला ढोने वालों की संख्या अनुमानत: 35,000 है। ये लोग दशकों से इस अमानवीय कार्य में लगे हुए हैंउन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी अन्य सुविधाओं के अलावा वैकल्पिक और गरिमापूर्ण कार्य दिए जाने तथा बेहतर आवास और शिक्षा की मांग कर रहे हैं। मोरे ने कहा, "पिछले वर्ष दिसम्बर में इस संबंध में एक जनहित याचिका बम्बई उच्च न्यायालय में दायर की गई थी। इस मामले पर अब तक तीन तारीखों पर सुनवाई हो चुकी है, लेकिन संबंधित विभागों के किसी भी अधिकारी ने सुनवाई में भाग नहीं लिया। इस कारण फैसले में देरी हो रही है..अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी।"सामाजिक संगठन के वकील असीम सरोडे ने कहा कि मैला ढोने वालों की नियुक्ति एवं सूखे शौचालय निर्माण (निषेध) अधिनियम 1993 के तहत भारत में सिर पर मैला ढोना प्रतिबंधित है। दुर्भाग्यवश आजादी के 65 साल बाद भी महाराष्ट्र और देश के कुछ हिस्सों में यह प्रथा आज भी जारी है। उल्लेखनीय है कि आमिर ने हाल ही में अपने टेलीवीजन कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' की एक कड़ी में इस मुद्दे पर रोशनी डाली थी। इसके बाद से देश में इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है।