19 February 2019



राष्ट्रीय
सरकार में बड़े पैमाने पर फेरबदल की सुगबुगाहटें
17-07-2012

नई दिल्ली. कांग्रेस में महासचिव राहुल गांधी को वर्ष 2014 के पहले प्रधानमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित करने की तैयारी चल पड़ी है। कांग्रेस की रणनीतिक टीम के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी के ज्यादातर नेता आगामी आम चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने के पक्ष में हैं। हालांकि पार्टी नेता ने राहुल गांधी का नाम सीधे-सीधे नहीं लिया।   राष्ट्रपति चुनाव के खत्म होते ही पार्टी संगठन और सरकार में बड़े पैमाने पर फेरबदल की सुगबुगाहटें चल रही हैं। इसी के साथ पार्टी आगामी आम चुनाव को लेकर अपनी रणनीति भी तैयार कर रही है। प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी तय करने की मांग करने वाले नेताओं का तर्क है कि, लोग जानना चाहते हैं कि कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद का अगला उम्मीदवार कौन होगा। एक अन्य नेता ने कहा कि स्वाभाविक है कि प्रधानमंत्री पद के लिए अगर अगले उम्मीदवार की बात हुई तो राहुल गांधी ही चर्चा में होंगे।  इन बैठकों में क्या  संगठन और सरकार में फेरबदल की चर्चा के बीच सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, महासचिव जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट की। हालांकि बैठक के बाद किसी ने मुलाकात में हुई बातचीत का ब्योरा नहीं दिया।  कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में नहीं  कांग्रेस महासचिव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर पार्टी में एकमत नहीं है। पार्टी में प्रभावी एक धड़े का मानना है कि कार्यकारी अध्यक्ष की जरूरत नहीं है। क्योंकि पार्टी के पास कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रूप में फुल टाइम अध्यक्ष हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू के जमाने में इंदिरा गांधी कार्यकारी अध्यक्ष बनी थीं, लेकिन उस समय प्रधानमंत्री पद पर होने की वजह से पंडित नेहरू के पास पार्टी कामकाज के लिए पर्याप्त समय नहीं था। राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष या कोई अन्य ऐसा पद सृजित करने का सुझाव भी है जो उन्हें प्रोटोकॉल में और नेताओं से अलग करे।   गौरतलब है कि सरकार से प्रणब मुखर्जी के जाने के बाद सरकार और संगठन में फेरबदल की बड़ी भूमिका तैयार हो रही है। नंबर दो के पायदान पर रक्षा मंत्री एके एंटनी को लाने के लिए प्रधानमंत्री की कवायद पर सहयोगी दल राकांपा ने ही लाल झंडी दिखा दी है। ऐसे में सर्वमान्य चेहरे की तलाश जोरों से हो रही है, जो सरकार और संगठन दोनों ही जगहों पर समान रूप से दखल दे।   कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने राहुल की बड़ी भूमिका पर अपने बयान को दोहराते हुए सोमवार को कहा, 'जो नेता प्रतिकूल परिस्थितियों में कमान संभालता है वही असली नेता होता है।' हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी साफ कह चुकी हैं कि वर्ष 2014 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने पद पर बने रहेंगे। ऐसे में पार्टी में ज्यादातर नेता चाहते हैं कि आगे के लिए राहुल की दावेदारी भी अभी से साफ कर देनी चाहिए।  पहले कैबिनेट में, फिर आगे कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता चाहते हैं कि मंत्रिमंडल का फेरबदल हो तो राहुल गांधी कैबिनेट का हिस्सा बनें। उसके बाद उन्हें अगले आम चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया जाए। वहीं कुछ नेता उन्हें पार्टी की कमान सौंपने के लिए रास्ता तलाशने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि राहुल गांधी और सोनिया गांधी का रुख क्या है इस पर पार्टी नेता अभी भी कुछ साफ नहीं बोल पा रहे हैं।