19 February 2019



राष्ट्रीय
राहुल गांधी ने तोड़ी चुप्पी
19-07-2012

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की संगठन या सरकार में बड़ी और बढ़ी भूमिका के सवाल पर राहुल गांधी ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि इस बार उनकी संगठन में भागीदारी निश्चित तौर पर पहले से बड़ी होगी। उन्होंने कहा कि वह इस बाबत फैसला ले चुके हैं अब अंतिम फैसला आलाकमान को लेना है। गौरतलब है कि राहुल के संगठन और सरकार में बड़ी भूमिका देने की काफी समय से मांग चल रही है। ऐसे में राहुल का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है।बुधवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सभी नेताओं को इस बाबत कुछ न बोलने के संकेत दिए भी दिए थे। उन्होंने कहा था कि राहुल पार्टी या सरकार में क्या भूमिका लेंगे और किस हद तक लेंगे यह उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए। संगठन और सरकार में राहुल को आगे लाने पर बढ़ रहे सुरों पर सोनिया ने साफ कहा था कि पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी निभाने का फैसला राहुल गाधी को खुद लेना है। अब जब राहुल ने खुद को बड़ी भूमिका के लिए तैयार किया है तो देखने वाली बात यह है कि सोनिया उन्हें पार्टी में क्या औहदा देती हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए संप्रग के उम्मीदवार हामिद अंसारी का परचा दाखिल करवाने बाद संसद भवन में एक सवाल के जवाब में सोनिया ने कहा कि राहुल की जगह पर यह फैसला और कोई नहीं कर सकता है। उन्हें ही फैसला करना है। सोनिया के बयान से एक बार फिर साफ था कि बाकी लोगों के साथ उन्हें भी राहुल के फैसले का इंतजार है। उत्तर प्रदेश चुनाव से काफी पहले से राहुल को कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बनाकर उनकी भूमिका बढ़ाने की सुगबुगाहट चलती रही है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और एसएम कृष्णा ने राहुल के आगे आने की जरूरत बताई थी। फिर उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी राहुल की बड़ी भूमिका का सवाल उठा दिया। बुधवार को भी दिग्विजय ने कहा कि सही समय आने पर राहुल पार्टी का नेतृत्व करेंगे। इससे कयास लगे कि राहुल गाधी सितंबर में काग्रेस के नए उपाध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष यानी औपचारिक तौर पर पार्टी में नंबर 2 का रोल निभाएंगे। इसे संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव लाए बिना पार्टी के भीतर सत्ता और शक्ति का केंद्र बदलने की दिशा में एक कदम माना जा रहा था। हालांकि, पहले भी राहुल ने अनिच्छा जताई थी और अभी भी उन्होंने इस बारे में कोई मन नहीं बनाया है। सोनिया गांधी की टिप्पणी उसी संदर्भ में अहम मानी जा रही थी।