19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
भारतीय कर्मी भी एचएसबीसी जांच के दायरे में
19-07-2012

वाशिंगटन। वैश्विक बैंक एचएसबीसी द्वारा आतंकियों के साथ लेनदेन संबंधी जांच के दायरे में बैंक के भारतीय कर्मी भी आ गए हैं। बैंक के कार्यकलाप की जांच के बाद अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट की 'परमानेंट सब कमेटी ऑन इन्वेस्टीगेशन' ने कहा है कि एचएसबीसी के 'एंटी-मनी लांड्रिंग कंप्लाइंस डिपार्टमेंट [एएमएल]' में भारतीय कर्मी भी हैं। बैंक के इस डिपार्टमेंट में कर्मचारियों की संख्या अपर्याप्त है। एचएसबीसी के काम की गुणवत्ता में कमियां पाई गई हैं। जांच में अमेरिका के द कंपट्रोलर ऑफ द करंसी [ओसीसी] के अधिकारियों के 2007 में भारत दौरे के दौरान इस बात का पता चला था कि बैंक के आतरिक नियंत्रण तंत्र में निगरानी की पद्धति कमजोर थी। ओसीसी देश में बैकों की संघीय नियामक है।मामले पर सब कमेटी के समक्ष सुनवाई में एचएसबीसी ने अपनी गलती के लिए माफी मांगी और इसे ठीक करने के प्रति वचनबद्धता दिखाई। 340 पृष्ठों की यह रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई थी। सब कमेटी के चेयरमैन सीनेटर कार्ल लेविन ने कहा, 'जांच में पता चला है कि एचएसबीसी ने अमेरिका के बैंकिंग नियमों का कड़ाई से पालन नहीं किया है।' जांच में यह भी पता चला है कि एचएसबीसी ने खुद से संबद्ध संस्थानों को मेक्सिको, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे देशों से बिना किसी प्रभावी नियंत्रण के अरबों डॉलर की संदिग्ध राशि अमेरिका लाने की अनुमति दी।एचएसबीसी का मुख्यालय लंदन में है। सीनेट के पैनल का आरोप है कि एचएसबीसी ने आतंकियों, मनी लाड्रिंग से जुड़े लोगों और नशीले पदार्थ का अवैध व्यापार करने वालों के साथ अरबों डॉलर का लेनदेन किया है।