19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
कालाधन की सूचना विदेश से पाना हुआ आसान
19-07-2012

पेरिस। काला धन ऐसी समस्या है जिससे छुटकारा पाने के लिए भारत सहित दुनिया के अधिकतर देश छटपटा रहे हैं। वैश्विक वित्तीय संस्था 'ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट' [ओईसीडी] ने अपने सदस्य देशों के बीच टैक्स से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए नियमों में संशोधन कर इस दिशा में पहल की है। इससे भारत भी लाभान्वित होगा। नियमों में इस बदलाव को देशों में कर पारदर्शिता बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। बदले नियमों के तहत कोई सदस्य देश करदाताओं के किसी समूह के बारे में दूसरे देश से सूचना प्राप्त कर सकता है। इसके लिए उस देश को अलग से उनकी पहचान की पुष्टि कराने की जरूरत नहीं होगी। फ्रांस की राजधानी स्थित मुख्यालय वाले ओईसीडी ने बुधवार को कहा कि उसने इस संदर्भ में कर नियमावली के धारा 26 में बदलाव किया है। इस धारा को काला धन और मनी लांड्रिंग के मामलों सहित वित्तीय आंकड़ों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जाना जाता है। उसने एक बयान जारी कर बुधवार को कहा, 'संस्था ने सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए बने अंतरराष्ट्रीय मानक के तहत ओईसीडी मॉडल टैक्स करार की धारा 26 को संशोधित किया है। इस मानक के तहत आग्रह करने वाले देश की कर व्यवस्था के लिए प्रासंगिक होने पर बैंक की गोपनीयता और घरेलू कर हितों पर ध्यान दिए बिना सूचनाएं देने की व्यवस्था है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस संशोधन में स्पष्ट रूप से समूह के बारे में भी सूचना के आग्रह का प्रावधान किया गया है जो पहले नहीं था। ओईसीडी के सेंटर फॉर टैक्स पॉलिसी ने एक बयान में कहा है कि इसका अर्थ यह हुआ कि कर प्राधिकरण अब कर दाताओं के किसी समूह के बारे में सूचनाएं प्राप्त कर सकता है। अगर मांगी गई सूचना महज जानकारी के लिए नही हों तो इसके लिए उसे अलग-अलग व्यक्ति का नाम नहीं लेना होगा। संस्था का कहना है कि कर अपराध और अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आपस में करों के आदान प्रदान की सुविधा धारा 26 में दी गई है।