24 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
रूस-चीन का सीरिया के खिलाफ प्रस्ताव पर वीटो
20-07-2012

संयुक्त राष्ट्र। रूस और चीन ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के खिलाफ नए प्रतिबंधों वाले प्रस्ताव पर दोबारा वीटो लगा दिया। दोनों देश परिषद के स्थायी सदस्य हैं, जबकि भारत उन 11 देशों में शामिल है, जिन्होंने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। हालाकि मतदान से पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून और संयुक्त राष्ट्र-अरब लीग के संयुक्त दूत कोफी अन्नान ने सुरक्षा परिषद से संगठित होने का आह्वान किया था। दोनों हस्तिया सीरिया में बढ़ रहे नरसंहार को रोकने तथा वहा राजनीतिक परिवर्तन का माहौल तैयार करने के लिए ठोस कार्रवाई करने के पक्ष में हैं। सीरिया को लेकर परिषद में बुधवार को मतदान होना था, लेकिन अन्नान के अनुरोध पर इसे बृहस्पतिवार को कराया गया।भारत ने मतदान के परिणाम को खेदजनक बताया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि परिषद द्वारा प्रस्ताव को अपनाने में सक्षम नहीं हो पाना खेदजनक है। उन्होंने कहा, हमारे हिसाब से बेहतर यह होता कि परिषद के सदस्य लचीलापन रुख अपनाते जिससे सभी पक्षों को एक संयुक्त संदेश जाता, घरेलू हितों की बजाय हमें सीरिया संकट पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ब्रिटेन के यूएन में स्थायी प्रतिनिधि मार्क लॉयल ग्राट ने कहा कि रूस और चीन के फैसले से ब्रिटेन भयभीत है। पश्चिमी देशों ने राष्ट्रपति बशर अल-असद सरकार द्वारा हमले न रोकने की स्थिति में दमिश्क के खिलाफ प्रतिबंधों की धमकी देने वाले प्रस्ताव पर जोर दिया है। रूस ने सीरियाई सरकार पर दोष मढ़ने, दंडित करने या नेतृत्व परिवर्तन वाले किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रयास का विरोध किया है। रूस और चीन पहले भी सुरक्षा परिषद में दो प्रस्ताव के मसौदों पर वीटो लगा चुके हैं।सीरिया में पिछले 16 महीने से जारी संघर्ष में स्थिति काफी बिगड़ चुकी है, लेकिन सुरक्षा परिषद रक्तपात और हिंसा को खत्म करने के लिए असद के खिलाफ कार्रवाई किए जाने को लेकर बंटी हुई है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तथा अमेरिका ने सीरिया पर प्रस्ताव तैयार किया है।ये सभी देश चाहते हैं कि सीरिया में संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक मिशन को 45 दिनों के लिए बढ़ाया जाए। यूएन चार्टर के चैप्टर सात को लागू किया जाए, जो परिषद को कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ सैन्य हस्तक्षेप करने की भी अनुमति देता है। मतदान से पहले मून के प्रवक्ता द्वारा जारी बयान में कहा गया, स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए बान ने सुरक्षा परिषद से अपनी जिम्मेदारी निभाने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के दायित्वों के आधार पर सामूहिक और प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। सीरियाई जनता बहुत लंबे समय से परेशान है। अब नरसंहार बंद होना चाहिए। अन्नान ने भी दमिश्क में बुधवार को हुए हमले सहित सभी रक्तपात और हिंसा की निंदा की। उन्होंने परिषद की सिर्फ निर्णायक कार्रवाई की जरूरत को रेखाकित किया था