21 February 2019



मनोरंजन
राजेश खन्ना पंचतत्व में विलीन
20-07-2012

मुंबई। हिंदी फिल्म जगत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना अब पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं लेकिन उनसे से जुड़ी यादों को लोग भूल नहीं पा रहे हैं। मधुर भंडारकर भी उन्हें भूल नहीं पा रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मधुर भंडारकर ने अपने ब्लॉग में लिखा, एक युग जिसने रोमांस से जुड़े मेरे सपनों को विकसित किया, एक दौर जिसने मुझे मेरी पहली हेयर स्टाइल दी, वह युग जो मुझे अब भी जीवंत बना देता है और मेरे चेहरे पर मुस्कान ला देता है, वह राजेश खन्ना का युग है। उन्होंने कहा, जब बुधवार शाम मैं राजेश खन्ना केपार्थिव शरीर के सामने खड़ा था तो यह अविश्सनीय था। जो व्यक्ति मेरे सामने लेटा है अपने अंदाज में उनकी पलकें नहीं झपक रही हैं. मुस्कराहट नहीं है और उनके अमर गुरु कुर्ते में उनका हाथ मुड़ नहीं रहा था जो काका की फिल्मों में उनकी छवि हुआ करती थी। भंडारकर ने कहा, उनके फिल्मी संवाद मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं अतीत में खो गया जब बचपन में उनकी फिल्म अंदाज देखने जाता था। जिंदगी का सफर है सुहाना गाना खत्म होता है और पर्दे पर राजेश खन्ना की मौत होती है तो मैंने रोना शुरू कर दिया। मैं उनको मरते हुए नहीं देख सकता। मेरा रोना देख मम्मी तुरंत मुझे थियेटर से बाहर लेकर चली आई। आज भी जब आनंद देखता हूं तो मैं उन्हें मरते हुये नहीं देख सकता। उन्होंने कहा, मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि जिसको मैं पर्दे पर मरते नहीं देख सकता उसके शव के सामने खड़ा रहूंगा। मैं बचपन से उन्हें देखते हुए बड़ा हुआ हूं, मैं उनके गुरु कुर्ते का आज भी दीवाना हूं। भंडारकर ने कहा कि लोग काका की एक झलक देखने के लिए मर मिटते थे। लड़कियां राजेश खन्ना की कार के टायर की धूल से अपनी मांग भर लेती थी, इस दीवानेपन को अगर आपने अनुभव नहीं किया तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते। राजेश खन्ना ने पर्दे पर जिस तरह मौत का दृश्य जिया वैसा किसी और अभिनेता नहीं किया