19 February 2019



राष्ट्रीय
डीजल-एलपीजी के दाम में इजाफे की कवायद
25-07-2012

नई दिल्ली.  केंद्र सरकार मानसून सत्र के बाद डीजल-एलपीजी के दाम में इजाफे की कवायद में जुटी है। सरकार का मानना है कि सब्सिडी के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए यह जरूरी है फिर भले ही मूल्यवृद्धि आंशिक ही क्यों न हो। वैसे इसके लिए सरकार मानसून सत्र के दौरान सहयोगी दलों से भी चर्चा करेगी।पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'मूल्य वृद्धि पर हालांकि अंतिम फैसला उस मंत्री समूह को लेना है जो इस पर निर्णय के लिए गठित किया गया है। लेकिन मंत्रालय माहौल बनाने और लोगों को इसकी जरूरत समझाने का कार्य संसद सत्र के दौरान ही शुरू कर देगा।'मंत्रालय के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद सांसद, मंत्रियों और सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि अंतिम फैसला राजनैतिक स्तर पर होगा, लेकिन मंत्रालय चाहता है कि नीति निर्धारण में महत्व रखने वाले सभी लोग इसकी जरूरत को समझें।फैसला इसलिए माना जा रहा जरूरी: डीजल, एलपीजी और केरोसीन के दाम पिछले एक साल से नहीं बढ़े हैं। दूसरी ओर कच्चे पदार्थ की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। एक तेल कंपनी के अधिकारी के अनुसार, डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर 11.26 रुपए, केरोसीन पर प्रति लीटर 28.56 रुपए और घरेलू एलपीजी पर प्रति सिलेंडर 319 रुपए का घाटा होता हैअगर दाम में इजाफा नहीं किया गया तो इस वर्ष तेल कंपनियों को 160,000 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा।गठित होना है जीओएम डीजल, केरोसीन, एलपीजी के दाम पर निर्णय करने के लिए गठित मंत्री समूह का फिर से गठन होना है क्योंकि इसके अध्यक्ष और पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए हैं। ऐसे में मंत्रालय शायद दाम बढ़ोतरी का प्रस्ताव आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति को प्रेषित करे।