19 February 2019



राष्ट्रीय
अनशन के दौरान दिखाई दे रहे हैं लोग कम
26-07-2012

नई दिल्ली। जंतर मंतर पर टीम अन्ना के अनशन का गुरुवार को दूसरा दिन है,लेकिन इस बार अनशन के दौरान लोग कम दिखाई दे रहे हैं। आंदोलन में पहले दिन भी लोग उम्मीद से कम थे और दूसरे दिन भी सुबह 10 बजे तक अनशनस्थल पर लोगों की संख्या काफी कम रही। रामदेव ने भी तय कार्यक्रम में बदलाव करते हुए गुरुवार को अनशन में शामिल होने का फैसला टाल दिया है। ऐसे में टीम अन्ना के मुख्य सदस्य अरविंद केजरीवाल भी बुलंदशहर की निचली अदालत के नोटिस पर वहां हाजिर होंगे। उन्होंने कहा कि वह कानून का पूरा सम्मान करते हैं, इसलिए नोटिस का पालन करते हुए उन्हें अदालत में पेश होना ही होगा। यह नोटिस संसद के विशेषाधिकार हनन मामले में दिया गया है। डायबिटिक होने के बावजूद अरविंद ने कोर्ट से समय मागने की बजाय खुद उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्णय लिया है। केजरीवाल के मुताबिक, 162 लोकसभा 39 राज्य सभा सासदों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं। गौरतलब है कि सांसदों के खिलाफ दिए गए उनके बयानों के बाद यह नोटिस जारी किया गया था। हालांकि केजरीवाल संसदीय सचिवालय को पहले ही इन नोटिस का लिखित जवाब दे चुके हैं। यही नहीं बाबा रामदेव भी अब तक अनशन स्थल पर नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में यह सवाल सामने आता है कि आखिर पिछली बार की तरह इस बार आंदोलन को लेकर लोगों में वह उत्साह क्यों नहीं नजर आ रहा हैं। इस बीच, टीम अन्ना में भी मतभेद सामने आने लगे हैं। यह मतभेद अनशन के मकसद को लेकर है। टीम अन्ना के सदस्य प्रशात भूषण और खुद अन्ना हजारे की इस मामले में अलग-अलग राय है। प्रशात भूषण ने कहा है कि यह अनशन केंद्र के भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ जाच और आरोपी सासदों के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के लिए है। प्रशात जब मंच से यह बात कह ही रहे थे कि अन्ना ने उनसे माइक लेकर ऐलान किया कि अनशन का मकसद भ्रष्टाचार से परेशान आम लोगों को राहत देने के लिए मजबूत लोकपाल लाना है। गौरतलब है कि बुधवार को अनशन के पहले ही दिन आंदोलन में ऊहापोह, असमंजस और अस्पष्टता भी खुल कर दिखाई दी। जहां पूरी टीम भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ एसआइटी की मांग करती रही। वहीं, अन्ना आंदोलन की तीनों प्रमुख मांगों पर पूरी तरह चुप्पी साधे रहे। इसकी बजाय वे लोकपाल का ही राग अलापते रहे। इसी तरह राष्ट्रपति पर हमले को लेकर भी असमंजस रहा। केजरीवाल और भूषण ने उन पर जमकर कीचड़ उछाला तो वहीं अनशन स्थल पर भ्रष्ट मंत्रियों की तस्वीरों में मुखर्जी की तस्वीर ढक दी गईं। लोकपाल की मांग को लेकर इस ऊहापोह के बारे में पूछने पर अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि आंदोलन अब भी जन लोकपाल के लिए ही है। मगर हमने ज्यादा व्यवहारिक होते हुए अपनी मांगें ऐसी रखी हैं। जब तक मंत्री भ्रष्ट होंगे, पार्टियों के अध्यक्षों की गर्दन सीबीआइ के फंदे में फंसी होगी और संसद में दागी बैठे रहेंगे, यह कानून पास नहीं हो सकता। इसलिए हमने पहले एसआइटी गठित कर इनके आरोपों की जांच करने और फास्ट ट्रैक अदालतें बनाकर सुनवाई करने की मांग रखी है।