22 February 2019



राष्ट्रीय
कोयले के आवंटन में चल रही धाधली बिजली संकट का मूल कारण
30-07-2012

नई दिल्ली। बिजली उत्पादन के लिए कच्चे माल के तौर पर सबसे अधिक आवश्यक कोयले के आवंटन में चल रही धाधली को ही बिजली संकट का मूल कारण बताया जा रहा है। कोयले की आपूर्ति में कमी और पूरे देश के थर्मल पावर स्टेशनों की खस्ता हालात की वजह से आज देश में बिजली संकट इतना ज्यादा गहरा गया है। गौरतलब है कि देश में 54 फीसदी बिजली का उत्पादन कोयले से ही होता है। कोयला सप्लाई करने में केंद्र सरकार की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड [सीआईएल] की मोनोपॉली है। कोल कंपनियां न तो मौजूदा खदानों से सौ फीसदी खनन करवा पा रही है और न ही नए खदानों से तेजी से कोयला निकलवाने में कामयाब हो रही है। कोल कंपनियों की आर्थिक हालत भी कहीं ना कहीं इस स्थिति की जिम्मेदार है। गौरतलब है कि 2017 तक 7420 लाख टन कोयले की जरूरत है, जबकि मात्र 5270 लाख टन मिलने की उम्मीद है। हालांकि मॉनसून की बेरूखी की वजह से भी कोयला उत्पादन काफी हद तक प्रभावित हुआ है। परमाणु बिजली या पनबिजली परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के मामले में भी सुस्ती से काम लिया जा रहा है। अमेरिका से परमाणु करार होने के बाद उम्मीद थी कि कुल बिजली उत्पादन में परमाणु बिजली का हिस्सा 2.62 फीसदी से बढ़ कर 9 फीसदी तक हो जाएगा,लेकिन जैतपुर [महाराष्ट्र]और कुडानकुलम [तमिलनाडु] में नए परमाणु बिजली घर बनाने की राह में आई रुकावटों को सरकार दूर नहीं कर पा रही है। बिजली चोरी और वितरण में धांधली के चलते बिजली बर्बाद करने वाले देश के चार प्रमुख राज्यों में क्रमश बिहार, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश शामिल हैं। बिहार में तो कुल उत्पादित बिजली का 42 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो रहा है। झारखंड और जम्मू-कश्मीर में 40 प्रतिशत तथा मध्य प्रदेश में 39 प्रतिशत बिजली बर्बाद हो रही है। यानी प्रति 100 मेगावाट में से 39 मेगावाट बिजली ट्रासमिशन लॉस, तकनीकी खामियों और बिजली चोरी के कारण बर्बाद हो जाती है।कैसे होगी बिजली की बचत बिजली का 60 प्रतिशत दुरुपयोग सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की लापरवाही के चलते होता है। इस कारण रोजाना हजारों यूनिट बिजली की बर्बादी तो स्वयं सरकारी विभाग ही कर देता है। घरों में भी हमारी लापरवाही के चलते काफी बिजली बर्बाद होती है।घरों व सरकारी कार्यालयों में कम बिजली खपत करके ज्यादा ऊर्जा देने वाले पावर सेविंग उपकरण लगाने चाहिए। अपनी आवश्यकतानुसार ही बिजली का उपभोग करें। रात के समय बिजली सयंत्र जैसे टीवी, कम्प्यूटर इत्यादि का स्विच बंद कर उनका प्लक हटाकर रखें। ज्यादातर सौर ऊर्जा के उपकरणों का उपयोग करें। साथ ही पॉवर सेविंग के लिए इनवेंटर व रोशनी के लिए ऑटो चार्ज बल्ब, ट्यूब का उपयोग करें। इससे काफी हद तक बिजली की बचत की जा सकती है।