19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
आतंकी पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर तीखी नोंक-झोंक
30-07-2012

वाशिंगटन। अमेरिका और पाकिस्तान के दो शीर्ष अधिकारियों के बीच अफ-पाक में आतंकी पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर तीखी नोंक-झोंक हो गई। इस घटना से फिर साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच संबंध किस हद तक खराब हो गए हैं।समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, अफ-पाक के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा के शीर्ष सलाहकार डगलस ई. ल्यूट और वाशिंगटन में पाकिस्तान की राजदूत शेरी रहमान के बीच यह तीखी नोंक-झोंक कोलार्डो एस्पेन में शुक्रवार को एक सम्मेलन के दौरान हुई। '60 मिनट' नाम कार्यक्रम के दौरान सवालों के जवाब में शेरी ने कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान [टीटीपी] के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन से उनके देश में रॉकेट से लगातार हमले कर रहे हैं। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शेरी ने कहा कि टीटीपी खतरनाक समूह है, जो पूर्वी अफगानिस्तान से पाकिस्तान में घुसपैठ कर रहा है। यह केवल हवाई बात नहीं है। रहमान ने कहा कि पिछले आठ महीनों के दौरान 52 मौकों पर पाकिस्तान ने अमेरिका और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन [नाटो] के अफगानिस्तान स्थित कमांडरों को उन स्थानों के बारे में बताया था, जहां से आतंकवादी हमले कर रहे थे, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। शेरी के इस वक्तव्य के बाद ओबामा के सलाहकार डगलस ल्यूट ने उन पर जवाबी हमला बोला। उन्होंने कहा कि टीटीपी की अफगानिस्तान में मौजूदगी का मुद्दा बहुत छोटा है। इसकी तुलना अफगान तालिबान और पाकिस्तान सरकार की दशकों पुरानी साठगांठ से नहीं की जा सकती है। दरअसल, अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान की सेना पर हक्कानी गुट के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बना रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर मौजूद आतंकी शिविरों का खात्मा करने की बजाय उल्टे अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी आतंकी गुटों के ठिकानों पर कार्रवाई की मांग कर पल्ला झाड़ रहा है। हक्कानी गुट को पाकिस्तान समर्थित माना जाता है। दूसरी ओर टीटीपी पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठन है। हालांकि, टीटीपी के अधिकतर आतंकी पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में ही रह रहे हैं, लेकिन वहां कार्रवाई करने में वह सक्षम नहीं है।