19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
पाकिस्तानी कोर्ट में मुंबई हमले के सुबूत स्वीऔकार्य नहीं
01-08-2012

इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार ने भारत को सूचित किया है कि उसके द्वारा मुंबई हमले के संबंध में उपलब्ध कराए गए सुबूत पाकिस्तानी कोर्ट में स्वीकार्य नहीं हैं। कारण बचाव पक्ष के वकीलों को भारतीय अधिकारियों के साथ जिरह की अनुमति नहीं दी गई। मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने भारत सरकार से कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकी उर रहमान लखवी सहित मुंबई हमले [26/11] के सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमे में भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए सुबूत स्वीकार्य नहीं हैं क्योंकि मार्च में पाकिस्तानी न्यायिक आयोग के भारत दौरे के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों को भारतीय अधिकारियों के साथ जिरह की अनुमति नहीं दी गई थी।द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार को लिखे पत्र में पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने रावलपिंडी की आतंकवाद रोधी अदालत द्वारा दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा है कि सुबूत के पाकिस्तानी कोर्ट में स्वीकार्य होने के लिए जरूरी है कि भारतीय अधिकारियों के साथ जिरह की अनुमति दी जाए। 28 जुलाई को सुनवाई के दौरान आतंकवाद रोधी अदालत ने दो पाकिस्तानी जांचकर्ताओं के बयान रिकॉर्ड करने से इन्कार कर दिया था। वे भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए सुबूत के संबंध में गवाही देना चाहते थे। जज ने व्यवस्था दी थी कि चूंकि पाकिस्तानी न्यायिक आयोग द्वारा भारत में इकट्ठा किए गए सुबूतों को मुकदमे का भाग नहीं बनाया गया था, इसलिए भारत की ओर से उपलब्ध कराए गए सुबूतों से संबंधित गवाही को भी रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता है। भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए सुबूतों में हमले के दौरान एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब का बयान, हमलावरों और पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं के बीच बातचीत की सीडी और चार भारतीय अधिकारियों के बयान शामिल हैं।