19 February 2019



अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी संसद की ईरान पर नए प्रतिबंधों को मंजूरी
03-08-2012

वाशिंगटन। अमेरिकी संसद ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने को मंजूरी दे दी है। ये प्रतिबंध परमाणु कार्यक्रम पर रोक तथा तेल निर्यात पर शिकंजा कसने के लिए लगाए गए हैं। संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को 421 के मुकाबले छह मतों से नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया। बाद में सीनेट ने इन्हें सर्वसम्मति से पारित किया। अब इसे राष्ट्रपति बराक ओबामा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इससे पहले ओबामा ने मंगलवार को कहा था कि ईरान के खिलाफ ऊर्जा और पेट्रो रसायन क्षेत्रों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। संसद की विदेश मामलों की समिति की अध्यक्ष एलेना रास लेतिनेन ने कहा कि नए प्रतिबंधों से ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने के लिए जरूरी नकद और कोष से वंचित हो जाएगा, क्योंकि तेल निर्यात उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ है। क्या है नए प्रतिबंध में 1. ईरान को तेल टैंकर बेचने वालों पर रोक 2. नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी को बीमा सुविधा देने वालो पर प्रतिबंध 3. चीन के बैक ऑफ कुनलुम और इराक के एलाफ इस्लामिक बैंक पर प्रतिबंध (ये दोनों ईरान से लेन-देन कर रहे थे)असर : चीन ने कड़ा विरोध किया। उसने अमेरिका से कहा कि बैक ऑफ कुनलुम पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा वापस ले ले।कर रियायतें जारी रखने का प्रस्ताव भी पारित वाशिंगटन। पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश के शासनकाल के समय की कर रियायतें जारी रखने का प्रस्ताव अमेरिकी संसद के निचले सदन में पास हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव से इस नहीं पास करने की अपील की थी। लेकिन, सदन ने सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के उस वैकल्पिक प्रस्ताव को खारित कर दिया, जिसमें अमीरों पर कर का बोझ बढ़ाने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव को 71 के मुकाबले 256 मतों से खारिज कर दिया। गौरतलब है कि हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। निचले सदन के इस प्रस्ताव से ऐसा राजनीतिक मतभेद पैदा हो गया है जो नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले शायद ही दूर हो। साथ ही यह सीनेट के प्रस्ताव से भी टकराव है। सीनेट ने व्यक्तिगत आयकर में छूट को 2,50,00 डॉलर से कम आय वाले परिवारों तक सीमित रखने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस वर्ग में अमेरिका के 98 फीसदी अमेरिकी आते हैं। ओबामा ने चेतावनी दी है कि वे ऐसे किसी विधेयक को मंजूरी नहीं देंगे जिसमें कर रियायत 2.5 लाख डॉलर सालना आय से ऊपर के परिवारों को भी देने की बात होगी।