19 February 2019



खेलकूद
फेल्प्स का कॅरिअर का सबसे बेहतर समापन
06-08-2012

लंदन। ओलंपिक इतिहास के सबसे सफल एथलीट अमेरिकी सुपर तैराक माइकल फेल्प्स ने शनिवार को अंतिम बार तरणताल में छलांग लगाकर सोना निकाला और इस तरह 18 स्वर्ण सहित कुल 22 ओलंपिक पदकों के साथ उनके कॅरिअर का पटाक्षेप हो गया। 27 वर्षीय फेल्प्स की अगुवाई में अमेरिकी मेडले रिले टीम ने तैराकी के अंतिम दिन स्वर्ण पर हाथ साफ किया। अपनी स्पर्धा के बाद बेहद भावुक नजर आ रहे फेल्प्स ने कहा, कॅरिअर का इससे बेहतर समापन नहीं हो सकता था। मैंने वह सबकुछ हासिल कर लिया जिसकी मुझे चाह थी। फेल्प्स ने एथेंस में छह, बीजिंग में आठ और लंदन में चार स्वर्ण सहित कुल 18 स्वर्म हासिल किए जो संख्या ओलंपिक इतिहास में दूसरे सर्वश्रेष्ठ एथलीट के स्वर्णिम तमगों से दोगुना है। फेल्प्स ने जब एक्वेटिक सेंटर में अपनी फाइनल रेस पूरी की तो दर्शक इस महामानव के सम्मान में खडे हो गए। दर्शकों में फेल्प्स की मां डेबी भी मौजूद थीं। तैराकी की अंतरराष्ट्रीय संस्था फीना ने फेल्प्स को उनकी उपलब्धियों के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया, जबकि जीवनपर्यत फेल्प्स के कोच रहे बॉब बाउमैन ने चुपके से अपने शिष्य के कान पर फुसफुसाते हुए कहा, आई लव यू। यह पूछने पर कि वह अभी पूरी तरह सक्षम हैं फिर क्यों संन्यास ले रहे हैं। फेल्प्स ने कहा, मैंने अपने आप से वादा किया था कि मैं कभी भी 30 की उम्र में नहीं तैरूंगा। मैं उन एथलीटों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहता जो 30 के हो चुके हैं। हालांकि मेरे पास अभी तीन साल हैं, लेकिन मैं इतने लंबे समय तक तैरना नहीं चाहता हूं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि मैंने वह सब कुछ हासिल कर लिया है, जिसकी मैंने तमन्ना की थी। जब आप कहते हैं कि अब आपको कॅरिअर में कुछ नहीं चाहिए तो आपको दूसरी चीजों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। मैं अपने कॅरियर को सिर्फ तीन शब्दों में समेटना चाहता हूं- आई डिड इट। मैं इतना ही कहना चाहता हूं। फेल्प्स ने कहा, हालांकि मेरे कॅरिअर में भी कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन इन सबके बावजूद मैं अपना लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा। मैंने वह कर दिखाया जो आजतक किसी ने नहीं किया था।लंदन ओलंपिक की यादें जीवनपर्यत मेरे साथ रहेंगी। जल्दी ही मैं इस अनुभव को एक पुस्तक में समेटूंगा। फेल्प्स ने 15 वर्ष की उम्र में 2000 में सिडनी में अपने ओलंपिक कॅरिअर की शुरूआत की थी। एक एथलीट के रूप में उन्होंने दुनियाभर में कई देशों की यात्राएं की हैं,लेकिन अब वह फिर दुनिया घूमना चाहते हैं। उन्होंने कहा, मैंने एथलीट के रूप में कई देशों की यात्राएं की लेकिन उनका मजा नहीं उठा पाया क्योंकि मेरा ध्यान अपने खेल पर ही लगा रहता था। अब मैं फिर से दुनिया घूमना चाहता हूं और बच्चों को तैराकी सिखाना चाहता हूं।