22 February 2019



राष्ट्रीय
अवैध रूप से देश में रह रहे बांग्लाबदेशी हुए बेखोफ
09-08-2012

नई दिल्ली। दिल्ली की कुल आबादी का चार प्रतिशत बांग्लादेशी नागरिक हैं। ये लोग अवैध रूप से देश में दाखिल हुए और अब सरकारी कागजातों के बल पर यहां आराम से रह रहे हैं। ऐसा नहीं कि प्रशासन व पुलिस इससे अवगत नहीं है, लेकिन इसके बावजूद न तो इन लोगों पर कोई लगाम लगी है और न ही इनकी आबादी में कमी हुई है।हाई कोर्ट के द्वारा तय किए आंकड़े से कोसों दूर है दिल्ली पुलिस वर्ष 2002 में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गृह मंत्रालय व दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि अवैध बांग्लादेशियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें ज्यादा से ज्यादा संख्या में डिपोर्ट किया जाए। हाई कोर्ट के आदेश के मद्देनजर दिल्ली पुलिस को हर जिले (11 जिले) में एक स्पेशल यूनिट गठन करने के लिए कहा गया, जो केवल अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को पकड़ने के काम करेगी। इस आदेश में यह भी साफ किया गया कि दिल्ली पुलिस को प्रतिदिन कम से कम 100 ऐसे बांग्लादेशियों को पकड़ना है। लेकिन इस निर्देश के 10 वर्ष बीतने के बाद जून 2012 तक दिल्ली पुलिस ने कुल 42 हजार 990 बांग्लादेशियों को पकड़ कर डिपोर्ट कराया है, जबकि निर्देश के अनुसार कार्रवाई होती तो यह आंकड़ा तीन लाख 65 हजार होना चाहिए था।आबादी ही नहीं अपराध भी बढ़ा रहे है पुलिस का कहना है कि ये लोग राजधानी में होने वाले हर तरह के अपराध में लिप्त हैं। चाहे वह लूट, डकैती, हत्या, चोरी, मादक पदार्थो की तस्करी, देह व्यापार, नकली नोटों की सप्लाई या फिर आतंकी गतिविधियां ही क्यों न हों। ये लोग अधिकतर रेलवे लाइन के नजदीक स्थित पॉश कॉलोनियों में ही आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। क्या कहना है पुलिस का जब पुलिस से लचर रवैये के बारे में बात की गई तो जवाब मिला कि यहां अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों में से 90 प्रतिशत ऐसे हैं, जो पैन कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड आदि बनवा चुके हैं। इसके अलावा बांग्लादेश का कोई प्रमाण पत्र ये अपने साथ नहीं रखते। यही कारण है कि यदि इन्हें पकड़ने के बाद छोड़ दिया जाता है। इसके लिए पुलिस सीधे सीधे प्रशासन व राजनीति को जिम्मेदार ठहराती है लेकिन ऑन रिकॉर्ड इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती।एफआरआरओ अधिकारी की दलील डिपोर्ट करने के तरीके पर जब दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारा काम सिर्फ पकड़ कर एफआरआरओ के सुपुर्द करना होता है। जब इस मामले पर एफआरआरओ एन.एस बुंदेला से बात की गई तो उनका कहना था कि हाई कोर्ट की गाइड लाइंस के मुताबिक ही बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया जाता है।