22 February 2019



राष्ट्रीय
अन्ना को पड़ा झुकना
11-08-2012

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ आम जन को एकजुट करने वाले अन्ना हजारे टीम अन्नाके राजनीतिक पार्टी बनाने के फैसले के हक में नहीं थे। वह नहीं चाहते थे कि टीमराजनीति की तरफ कदम बढ़ाए। अन्ना नहीं चाहते थे कि टीम अन्ना एक राजनीतिक पार्टीबनाने के बाद उनके नाम का इस्तेमाल करे, लिहाजा उन्होंने जंतर-मंतर के मंच से इसकाएलान होने के बाद टीम अन्ना को भी भंग कर दिया था। खबरों के मुताबिक इस बाबत लिए फैसले के चलते वह टीम अन्ना के सदस्यों से काफी खफा भी थे।मीडिया में आई खबर के मुताबिक अन्ना पार्टी बनाने के इस कदर खिलाफ थे किउन्होंने पार्टी बनाने के विरोध में जंतर-मंतर पर टीम के सदस्यों के बीच महात्मा गाधी के एक भाषण की प्रतिया तक बांटी थीं। इसमें टीम अन्ना को चेतावनी देते हुए कहागया था कि आप अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं। अन्ना इसके जरिए टीम को यह बताना चाहतेथे कि वह गलत दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।राजनीतिक पार्टी बनाने पर अन्ना ने टीम से कई कुछ सवाल भी किए थे। जैस वह फंड कहां से जुटाएंगे और यह कैसे तय होगा कि कौन चुनाव लड़ेगा? अन्ना चाहते थे कि फिलहाल राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला टाल दिया जाए।जंतर-मंतर पर चले दस दिन के अनशन के दौरान अन्ना सरकार के नकारात्मक रवैये से बेहद खफा थे। हालांकि वह मानते थे कि इसकी जरूरत पड़ सकती है। अन्ना चाहते थे कि इस बाबत टीम गाव-गाव, शहर-शहर जाकर लोगों से मिलें और उनके मुद्दों पर बात करे और उनकी राय ले, इसके बाद ही वह इसकी घोषणा भी करे।अन्ना हड़बड़ी में पार्टी बनाने के घोर विरोधी थे। लेकिन अन्य सदस्यों की मंशा केआगे उन्हें झुकना ही पड़ा। अन्ना के साथ साथ संतोष हेगड़े और श्री श्री रविशकर जैसे वरिष्ठ सदस्य भी पार्टी बनाने के खिलाफ थे।