19 February 2019



राष्ट्रीय
विलासराव देशमुख ने हारी जिंदगी की जंग
14-08-2012

नई दिल्ली। काग्रेस के मराठा छत्रप हैं विलासराव देशमुख जिंदगी की जंग हार गए। आज मंगलवार को चेन्नई के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।उनकी किडनी और लिवर के काम करना बंद करने के बाद उन्हें चेन्नई के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल वह लाइफ सपोर्ट ेसिस्टम पर चल रहे हैं।कांग्रेस के कद्दावर नेता विलासराव का महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा नाम है। साथ ही वो महाराष्ट्र की राजनीति में काग्रेस के सबसे अहम सिपहसलार हैं। दरअसल इसकी वजह महाराष्ट्र के लगभग सभी बिजनेस घरानों से विलासराव देशमुख के मधुर संबंध हैं। देशमुख को औद्योगिक घरानों का समर्थन मिला हुआ है और कद्दावर नेता शरद पवार के काग्रेस छोड़ने के बाद से काग्रेस महाराष्ट्र के औद्योगिक संबंधों को लेकर विलासराव देशमुख पर ही बहुत हद तक निर्भर रही है.-जन्म, शिक्षा और परिवार विलासराव देशमुख का जन्म 26 मई 1945 को लातूर जिले के बाभालगाव के एक मराठा परिवार में हुआ था। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से विज्ञान और ऑर्ट्स दोनों में स्नातक की पढ़ाई की है। पुणे के ही इंडियन लॉ सोसाइटी लॉ कॉलेज से उन्होंने कानून की पढ़ाई की। विलासराव ने युवावस्था में ही समाजसेवा करना शुरू कर दिया था। उन्होंने सूखा राहत कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। देशमुख और उनकी पत्‍‌नी वैशाली को तीन बेटे हैं। अमित देशमुख, रितेश देशमुख और धीरज देशमुख। अमित देशमुख लातूर से विधायक हैं और रितेश जानेमाने बॉलीवुड कलाकार हैं।-राजनीतिक सफर विलासराव देशमुख ने पंचायत से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और पहले पंच और फिर सरपंच बने। वो जिला परिषद के सदस्य और लातूर तालुका पंचायत समिति के उपाध्यक्ष भी रहे। विलासराव युवा काग्रेस के जिला अध्यक्ष भी रहे और अपने कार्यकाल के दौरान युवा काग्रेस के पंचसूत्रीय कार्यक्रम को लागू करने की दिशा में भी काम किया।इसके बाद विलासराव देशमुख ने राज्य की राजनीति में कदम रखा और 1980 से 1995 तक लगातार तीन चुनावों में विधानसभा के लिए चुने गए और विभिन्न मंत्रालयों में बतौर मंत्री कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने गृह, ग्रामीण विकास, कृषि, मतस्य, पर्यटन, उद्योग, परिवहन, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, युवा मामले, खेल समेत अनेक पदों पर मंत्री के रूप में कार्य किया। विलासराव देशमुख का जन्मस्थल लातूर ही उनका चुनावी क्षेत्र भी है। राजनीति में आने के बाद से उन्होंने लातूर का नक्शा ही बदल दिया है।-मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री 1995 में विलासराव देशमुख चुनाव हार गए लेकिन 1999 के चुनावों में उनकी विधानसभा में फिर से वापसी हुई और वो पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। लेकिन उन्हें बीच में ही मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़नी पड़ी और सुशील कुमार शिदे को उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन अगले चुनावों में मिली अपार सफलता के बाद काग्रेस ने उन्हें एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाया। पहली बार विलासराव देशमुख 18 अक्टूबर 1999 से 16 जनवरी 2003 तक मुख्यमंत्री रहे जबकि दूसरी बार उनके मुख्यमंत्रित्व का कार्यकाल 7 सितंबर 2004 से 5 दिसंबर 2008 तक रहा। मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के दूसरे कार्यकाल के दौरान मुंबई सीरियल ब्लास्ट हुआ। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय राजनीति का रुख किया और राज्यसभा के सदस्य बने। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई और उन्होंने भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम मंत्री, पंचायती राज मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री के पद पर काम किया। वर्तमान में विलासराव देशमुख विज्ञान और तकनीक मंत्री के साथ ही भू-विज्ञान मंत्री भी हैं। इसके साथ ही विलासराव देशमुख मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।-विवादों से भी रहा नाता विलासराव देशमुख का विवादों से भी नाता रहा है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में फिल्मकार सुभाष घई को फिल्म संस्थान बनाने के लिए सरकार की ओर से 20 एकड़ जमीन मुहैया कराई थी। जिसे 2012 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया और सुभाष घई को जमीन लौटाने का आदेश दिया। 2010 में अपने भाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले में मुंबई पुलिस पर दबाव डालने के शिकायत मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। विलासराव देशमुख मुंबई पर 26/11 हमले के बाद अपने बेटे रितेश देशमुख और फिल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा के साथ होटल ताज का मुआयना करने पहुंचे। विपक्ष ने उनकी जबरदस्त आलोचना की और आरोप लगाया कि वो अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए रामगोपाल वर्मा को होटल ताज ले गए। इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि देशमुख को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सीएजी की एक रिपोर्ट में विलासराव देशमुख पर अपने मुख्यमंत्री के पद के दुरुपयोग करने का एक और आरोप लगा है। इसमें उनपर अपने परिवार द्वारा चलाए जा रहे ट्रस्ट को सस्ते में 23,840 वर्ग मीटर के प्लॉट का आवंटन करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने एक चौथाई कीमत पर प्लॉट का आवंटन करवाने में भूमिका निभाई। इसके अलावा चर्चित आदर्श घोटाले में भी उनका नाम उछला।