17 February 2019



प्रादेशिक
प्रभात झा ने सांसद निधि का ब्यौरा देकर बीजेपी के जनप्रतिनिधियों के लिए चुनौती पेश की
16-08-2012

श्री प्रभात झा ने बीजेपी प्रदेशाध्य़क्ष की कमान संभालने के बाद भले ही कितने विवादों को न्यौता दिया हो लेकिन राजनीतिक जीवन में शुचिता के अपने उददेश्य को जगजाहिर भी किया है। वे पहले ऐसे राज्यसभा सांसद हैं जो सांसद निधि का वर्षवार ब्यौरा जनता के सामने पेश करते हैं कि उन्होंने सासंद निधि का कितना पैसा कहां खर्च किया। इस साल भी उन्होंने पांच करोड़ रुपए के खर्च का पूरा हिसाब-किताब बीजेपी की वेबसाइट और मीडिया को दिया है। इसमें ग्वालियर,भोपाल,भिंड,धार,झाबुआ, उज्जैन तथा अन्य जिलों में कितना पैसा विकास कार्यों में खर्च किया है उसका सार है। जाहिर है यह काफी हिम्मत का काम है औऱ ऐसे समय जब राजनेताओं की पहचान पैसा लेकर ठेके दिलवाने की हो गई है तब श्री झा की पहल अपने आप में अनूठी है। बीजेपी इसे अनुकरणीय मानती है। इस मामले में बीजेपी का सीना ज्यादा नहीं फूलना चाहिए क्योंकि बीजेपी के अधिकांश विधायक तथा सांसद ऐसे हैं जो यह बताने में घबराते हैं कि उन्होंने सांसद या विधायक निधि का खर्चा कहां किया। जाहिर है इसमें उन्हें अपनी पोल खुलने का डर है लेकिन कांग्रेस ने भी इस मामले में कोई पहल कभी नहीं की। कांग्रेस के नेता यह मानते हैं कि सोशल आडिट राजनीतिक जीवन में जरूरी है लेकिन उसकी पब्लिसिटी नहीं होना चाहिए।

राजनीतिक जीवन में जब से शुचिता कम हुई है तभी से अन्नाओं औऱ बाबाओं को तरजीह मिलने लगी है। आम जनता अपने जनप्रतिनिधि से आशा रखती है कि वह पारदर्शिता के साथ उन्हें अपने कामों का ब्यौरा दे लेकिन इतना नैतिक साहस अधिकांश नेताओं में बचा ही नहीं है।