17 February 2019



प्रादेशिक
जमुनादेवी के सवाल का जवाब पांच साल बाद
24-08-2012

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त कोई शख्स किसी विभाग से कोई जानकारी मांगे औऱ वह पांच साल बाद उसे मिले वह भी स्वर्गवासी होने के बाद । मध्यप्रदेश में निरंकुश अफसरशाही के चलते यही सब हो रहा है।  मामला स्व. जमुनादेवी से जुड़ा है वे जब मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थीं तब उन्होंने वन विभाग को एक पत्र लिखकर जानकारी मांगी पांच साल बाद उन्हें यह जानकारी भेजी गई है ।

मध्यप्रदेश के सरकारी आफिसों में कामकाज की गति कितनी तेज है इसका अंदाजा वैसे तो आम आदमी को रोजमर्रा के जीवन में होता ही रहता है लेकिन अब हम जो बताने जा रहे हैं उसे देखकर आपको यह मान जाएंगे कि वाकई सरकारी आफिसों मे भर्राशाही का आलम है। मामला 2007 का है। जमुनादेवी जी मध्यप्रदेश विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष थीं। उन्हें गांव हरिया औऱ धनवाही की राजस्व भूमि के मामले में वन विभाग से जो उत्तर मिला उस पर उन्होंने शक जाहिर करते हुए वन विभाग को एक पत्र लिखकर जवाब मांगा। 2007 में जमुना देवी द्वारा लिखे गए इस पत्र का जवाब 2013 में पूरा हो पाया। जबकि लगभग डेढ़ साल पहले ही जमुनादेवी जी बैकुंठवासी हो गईं। और यह बात पूरा प्रदेश जानता है लेकिन सरकारी आफिसों में बैठे बाबुओं को यह बात पता नहीं है तभी तो 2007 मे लिखे पत्र का जवाब पीसीसीएफ अनिल ओबेराय ने 2012 में दिया। सवाल यह उठता है कि जब एक कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त वीआईपी को पांच साल में जवाब मिला तो आम आदमी का क्या होता होगा। स्व. जमुनादेवी के बाद नेता प्रतिपक्ष बने अजय सिंह यही सवाल सरकार के सामने उठा रहे हैं। सुशासन के दावे करने वाली बीजेपी भी इस मामले में बैकफुट पर है हकीकत भी यही है कि प्रदेश मे सुशासन कम कुशासन ज्यादा नजर आता है। तहसीलों तथा जिला कार्यालयों तथा विभागाध्यक्ष कार्य़ालयों में कितनी तेज गति से काम होता है यह बात आम जनता , उद्योगपति ही सही ढंग से बता सकते हैं। स्व. जमुनादेवी के स्वर्गवासी हो जाने के बाद उनके द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब पांच साल बाद मिलने पर बीजेपी के कई नेता भी खिन्न हैं बीजेपी प्रवक्ता विजेश लूनावत मानते हैं कि ऐसे लापरवाह अफसरों पर तो सख्त कार्रवाई होना चाहिए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ओर तो देश विदेश जाकर उद्योगपतियों के सामने पलक पावड़े विछा रहे हैं कि मध्यप्रदेश आइए यहां उद्योग लगाईए, यहां बहुत अच्छा औऱ स्पीड से काम होता है क्या वाकई इसी स्पीड से काम होता है। वन विभाग के अफसरों को चुल्लू भर पानी तलाशना चाहिए।