17 February 2019



प्रादेशिक
हवा हवाई तीर्थाटन
25-08-2012

बुर्जुगों को तीर्थ यात्रा कराने की मध्यप्रदेश सरकार की योजना आम आदमी के लिए तो हवा-हवाई ही साबित हो रही है।इस यात्रा में प्रत्येक जिले से इतना कम कोटा रखा गया है कि आने वाले बीस पच्चीस सालों में भी किसी भी जिले के पचास फीसदी बुर्जुग भी तीर्थ यात्रा पर नहीं जा पाएँगे। खुद नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के जिले में मात्र सवा सौ तीर्थ यात्रियों का कोटा रखा गया है।

वीओ-1 दूर के ढोल सुहावने..... वाली कहावत की तर्ज पर बुर्जुगों को तीर्थ दर्शन कराने की मध्यप्रदेश सरकार की योजना आम गरीब बुर्जुगों के लिए किसी मजाक के कम नहीं हैं। एक तो इस यात्रा में सरकारी अफसरों ने इतने फच्चर फंसा दिए हैं कि आम मध्यमवर्गीय बुर्जुग तो यात्रा पर जा ही नहीं पाएगा। क्योंकि टैक्स की शर्त उसमें सबसे पहले लगी हुई है। यह सभी जानते हैं कि आम तृतीय श्रेणी कर्मचारी भी वर्तमान टैक्स स्लेब में आ जाता है। इसके बाद जिलो से ले जाए जाने वाले बुर्जुगो का कोटा भी कितना है आप खुद आंकड़े देखिए भोपाल कुल आबादी 16लाख  और कोटा मात्र 204 ,विदिशा कुल आबादी 5लाख  और  कोटा मात्र 126 राजगढ़ कुल आबादी साढ़े 5 लाखऔर  कोटा मात्र 133 सीहोर कुल आबादी ढाई लाख औऱ कोटा मात्र 113हरदा कुल आबादी  डेढ़ लाख  औऱ कोटा मात्र 49 इन शहरों की आबादी औऱ वहां के कोटे को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले बीस पच्चीस सालों में भी किसी भी जिले के सारे बुर्जुग तीर्थ यात्रा का लाभ नहीं उठा सकते।

जाहिर है इतने लंबे इंतजार के बाद कई बुर्जुग तो भगवान के दर्शनों की आस में भगवान को ही प्यारे हो जाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार की सारी घोषणाएं हवा हवाई होती हैं । बुर्जुग तीर्थ दर्शन योजना में भी कोटा तो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। यह बुर्जुगों का अपमान है।

  इधर बीजेपी के नेताओं का कहना है कि तीर्थ दर्शन योजना में शुरुआती साल में ही संख्या कम है लेकिन यह आवश्यकता के अनुसार बढ़ जाएगी औऱ लाटरी से ही सही कुछ बुर्जुगों को तो तीर्थ पर जाने का मौका मिल ही रहा है।

दरअसल योजनाएं बनाते समय अधिकारी ,जमीनी हकीकतों तो पूरी तरह नजर अंदाज कर देते हैं यही वजह है कि जितनी तेजी से किसी योजना की तारीफ होती है बाद में उसी तेजी से उसकी निंदा भी सरकार के सामने आ जाती है। सरकार को अब यह तो साफ करना ही होगा कि वह एक साल में कितनी बार कुल कितने बुर्जुगों को तीर्थ यात्रा कराएगी। वरना फिलहाल के हालातों को देखते हुए तो लगता नहीं है कि किसी भी जिले के बुर्जुग इस सरकारी तीर्थाटन से खुश होंगे।