15 February 2019



राष्ट्रीय
कसाब की फांसी की सजा बरकरार
29-08-2012

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब के मृत्युदंड पर मुहर लगा दी। मुंबई पर 26 नवंबर 2008 को हमला करने वाले 10 आतंकियों में से कसाब एकमात्र ऐसा आतंकी है, जिसे जीवित पकड़ा गया था। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे। न्यायमूर्ति आफताब आलम व न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने कहा कि हम इस रुख को बरकरार रखने के लिए बाध्य है कि फांसी ही एकमात्र ऐसी सजा है, जिसे इस मामले की स्थितियों में दी जा सकती है। निचली अदालत ने कसाब को मृत्युदंड सुनाया था और बाद में बंबई उच्च न्यायालय ने उसकी सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद उसने मृत्युदंड के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।  न्यायालय ने कसाब के इस तर्क को खारिज कर दिया कि मुंबई पर हुआ आतंकी हमला भारत सरकार के खिलाफ युद्ध था, न कि भारत या यहां के लोगों के खिलाफ।  न्यायालय ने कहा कि भारत सरकार, देश का एकमात्र निर्वाचित अंग और संप्रभु सत्ता का केंद्र है। इसके बाद न्यायालय ने कहा कि आरोपी का प्राथमिक और मुख्य अपराध भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना ही था। सर्वोच्च न्यायालय ने कसाब के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उसने कहा था कि गिरफ्तार किए जाने के तत्काल बाद उसे वकील न मुहैया कराए जाने से पूरी प्रक्रिया बिगड़ गई।  न्यायालय ने यह भी कहा कि कसाब को वकील मुहैया कराने की कोशिशें की गई, लेकिन उसने यह कहते हुए हर बार इंकार कर दिया कि उसे भारतीय वकील की आवश्यकता नहीं है। फैसले में कहा गया है कि कसाब के वकील को दिया गया समय पर्याप्त था। न्यायालय ने कसाब का वह तर्क भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि पुलिस के समक्ष इकबालिया बयान उसने अपनी मर्जी से नहीं दिया था। फैसले में कहा गया है कि इकबालिया बयान बिल्कुल अपनी मर्जी से दिया गया था।