18 February 2019



प्रादेशिक
संघ खुश नहीं है प्रदेश बीजेपी सरकार से
03-09-2012

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ इन दिनों मध्यप्रदेश में चल रही राजनीतिक उठापटक को लेकर खुश नहीं है। एक ओऱ जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था का दावा कर रहे हैं वहीं इंदौर सहित कई शहरों में पार्टी औऱ संघ के पदाधिकारी जिस तरह से सरकार के फैसलों के खिलाफ खुल कर सामने आ रहे हैं उससे यह बात तो साफ हो गई है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी के कई नेताओं की राह आसान नहीं होगी।मुख्यमंत्री बनने के बाद से शिवराज सिंह चौहान को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का जिस तरह से साथ मिला उससे उनकी सत्ता की राह आसान होती चली गई लेकिन हालिया कुछ मामलों में संघ ने प्रशासनिक लचरता औऱ कुछ मंत्रियों के कामकाज पर जिस तरह से सवाल उठाए हैं उससे यह संदेश जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में इस बात पर संघ कोई बखेड़ा खड़ा कर सकता है। वैसे भी उमा भारती के यूपी जाने के बाद चौहान को चुनौती देने वाला कोई नहीं रहा लेकिन अब संघ औऱ बीजेपी के कुछ नेता जिस तरह से त्यौरियां चढ़ा रहे हैं उससे हालात संवरने के बजाय बिगड़ रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को भी उन लोगों से दूरी बनाना होगी जो उनकी छवि को दागदार बनाने में जुट गए हैं। देखा जाए तो बीजेपी के गुट ने पिछले तीन महीने के दौरान जिस तरह की भूमिकाएं निभाई हैं उससे विधायक बर्खास्तगी कांड, कोल ब्लाक आबंटन पर लचर दलीलें, इंदौर में संघ के नेताओं का सीएम तथा बीजेपी मंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी करना मुख्यमंत्री की छवि के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव  और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तो साफ कह चुके हैं कि मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था नाम की चीज ही नहीं रही है। इंदौर में संघ के प्रदर्शन पर भी उन्होंने चुटकी ले ली। संघ औऱ बीजेपी के बिगड़ते रिश्ते खुद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा के लिए ठीक नहीं हैं। वैसे वे भी प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद जिस तरह से दिलीप सूर्य़वंशी टाइप भ्रष्ट लोगों के समर्थन में बयान देने लगे तब से पार्टी तथा संघ में उनकी छवि पर बुरा असर पड़ा है। पार्टी के एक सांसद रघुनंदन शर्मा ने साफ कह दिया कि दिलीप जैसे भ्रष्ट लोगों की हिमायत में सार्वजनिक बयान देना जरूरी था क्या। कुल मिलाकर बीजेपी के लिए कांग्रेस तो कम मुसीबतें खड़ी कर रही है लेकिन उनकी ही पार्टी के नेता तथा संघ फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है।