22 February 2019



राष्ट्रीय
राज ने मुंबई मानस मुद्दे को किया हाईजैक
03-09-2012
बिहार के लोगों पर अपने तीखे बाण छोड़ने वाली शिवसेना को पछाड़कर अब मनसे प्रमुख राज ठाकरे इसी मुद्दे को भुनाने में जुट गए हैं। कभी शिवसेना के झंडे तले अपने अपने चाचा बाल ठाकरे से राजनीति का ककहरा सीखने वाले राज ठाकरे अब उन्हीं के मराठी मानस के मुद्दे को हाईजैक कर शिवसेना के सामने एक नई चुनौती देने में जुट गए हैं। बिहार के लोगों को महाराष्ट्र से खदेड़ने का बयान देकर इन दिनों वह काफी आलोचना झेल रहे हैं। कोई राज को सिरफिरा कह रहा है तो कोई उन्हें जुबान संभालकर बोलने की हिदायत दे रहा है। लेकिन इन सभी के बीच कुछ ऐसा हो रहा है, जो इससे पहले कभी नहीं हुआ है। शिवसेना राज ठाकरे के इस मुद्दे को उठाने के दो दिन बाद हरकत में आई और इसकी कमान संभालने वालों में खुद बाल ठाकरे थे। हालांकि उन्होंने राज के समर्थन में सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन इस मुद्दे का समर्थन जरूर कर दिया। शिवसेना की तरफ से राज के खिलाफ या फिर उनके समर्थन में दो दिन बाद आए इस बयान पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मुद्दे पर अभी तक चुप्पी साधे बैठी शिवसेना मुमकिन है कि कहीं न कहीं इस बात से हैरान जरूर होगी कि राज ने एक ऐसे मुद्दे को हाईजैक करने में सफलता पा ली है, जिस पर चलकर वह आगामी चुनाव में अपनी भारी जीत की आस लगाए बैठी थी। दरअसल, महाराष्ट्र में शिवसेना एक ऐसी पार्टी रही है जो हिंदुत्व समेत ऐसे मुद्दों को आगे रखने में ज्यादा अहम रही, जो वहां की महाराष्ट्र की जनता खासकर मराठी मानस के सिर चढ़कर बोल सकें। शिवसेना ने इससे पहले मराठी भाषा का भी मुद्दा उठाया था। उससे पहले बंबई का नाम मुंबईया देवी के नाम पर मुंबई करने, फिल्म में बंबई की जगह मुंबई बोलने समेत कई ऐसे मुद्दों को शिवसेना ने उठाया है जो कहीं न कहीं सीधे मराठी जन से जुडे़ रहे हैं। यह ऐसे मुद्दे थे, जिन्हें यदि मराठी मानस ने सीधे समर्थन नहीं किया तो किसी ने इनका विरोध भी कभी नहीं किया। लेकिन अब राज ठाकरे शिवसेना की राह पर चलकर अपना राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि इस बार उन्होंने शिवसेना से पहले मराठी मानस के मुद्दे को हाईजैक कर लिया है। आने वाले दो वर्ष महाराष्ट्र के लिए यूं भी बेहद अहम होने वाले हैं। इन दो वर्षो में जहां एक बार आम चुनाव होना है वहीं दूसरी बार विधानसभा चुनाव होंगे। लिहाजा राज ठाकरे का पूरा जोर इन चुनावों पर लगा है। वर्ष 2009 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 145 सीटों पर अपनी विजयी पताका फहराई थी। वहीं इन चुनावों में शिवसेना महज उससे पंद्रह सीट ज्यादा लेकर 160 सीटों पर जीत दर्ज कराने में सफल रही थी। इस विधानसभा चुनाव के दौरान एक बात बेहद खास थी। राज ठाकरे भले ही महाराष्ट्र में नया नाम नहीं था लेकिन जिस तर्ज पर वह वर्ष 2006 में शिवसेना से अलग हुए और अपनी पार्टी मनसे का गठन किया उस हिसाब से उन्हें 2009 के विधानसभा चुनाव में उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली।