22 February 2019



राष्ट्रीय
नौकरशाह जो ठहरे, नेता होते तो इस्तीफा दे देते
05-09-2012
भारतीय जनता पार्टी [भाजपा] ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर एक और तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा है कि मनमोहन यदि \'नेता\' होते तो कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में अब तक इस्तीफा दे चुके होते, लेकिन उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया, क्योंकि वह एक नौकरशाह है। भाजपा ने अपने मुखपत्र \'कमल संदेश\' के ताजा अंक में \'वे नेता होते तो इस्तीफा दे देते\' शीर्षक से लिखे गए संपादकीय में यह बात कही है। इसमें प्रधानमंत्री पर तो हमला बोला ही गया है, साथ ही कांग्रेस व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा गया है। इसमें सोनिया के विदेशी मूल के मुद्दे को भी हवा देने की कोशिश की गई है। लेख में कहा गया है कि अगर मनमोहन सिंह नैसर्गिक नेता होते तो वह देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा, पद की मर्यादा व संविधान की लाज बचाने व लोकतंत्र में नागरिकों की आस्था बनी रहे, इस खातिर इस्तीफा दे देते, पर वह है तो मूल रूप से नौकरशाह, इसलिए उनसे यह अपेक्षा निरर्थक है। इसमें कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा गया है कि कांग्रेस कितनी खोखली हो गई है कि वह एक विदेशी को अध्यक्ष बनाती है और वहीं एक नौकरशाह रहे व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री बनाती है। नौकरशाह नेता व नेता नौकरशाह नहीं हो सकता। लेख में कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा गया है कि कांग्रेस ने देश में नैसर्गिक नेताओं को समाप्त करने का सिलसिला प्रारंभ कर दिया है। नौकरशाहों को नेता बनाने का सिलसिला प्रारंभ होने का ही परिणाम है कि भारतीय संसद घोटालों का बाजार बन चुकी है। संपादकीय में वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को एक नेता बताते हुए कहा गया है कि मनमोहन सिंह के हाथों आठ वर्ष केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी घुटन की जिंदगी जीते रहे, लेकिन वह आखिर क्या करते। वह भारत के नैसर्गिक नेता रहे है, उनमें नौकरशाही के तत्व नहीं थे, इसलिए वह घोटाले की घुटन से सिसक रही संसद से बाहर आ गए। कांग्रेस में जो भी नेता है, उनका भविष्य अब बिना मैनेजरी के उज्ज्वल नहीं है।